सोंचा था ईश्वर ने दुनियां हो रंगीन ना रहे कोई एकाकी जानवर तो जानवर फिर नर क्यों अकेला? जैसे हाथी और घोड़ा कबुतर और चिडि़या, बंदर और गुरिल्ला आदमी के साथ करो कुछ फिट पर लुप्त हो गये – गुम हुये होब… more →
हरिहर झाHarihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: सोंचा था ईश्वर ने दुनियां हो रंगीन ना रहे कोई एकाकी जानवर तो जानवर फिर नर क्यों अकेला? जैसे हाथी और … more →