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Blogs about: होली के रसिया

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रसिया को नार बनावो री रसिया को1 comment

pushtimarg wrote 1 year ago: रसिया को नार बनावो री रसिया को। कटि लहंगा गल माल कंचुकी, वाको चुनरी शीश उढाओ री।रसिया को॥१॥ बाँह बडा … more →

मत मारे दृगन की चोट रसिया होरी मे

pushtimarg wrote 1 year ago: मत मारे दृगन की चोट रसिया होरी में, मेरे लग जायेगी। मैं तो नारी बडे बडे कुल की, तुम में भरी बडी खोट। … more →

चिरजीयो होरी को रसिया

pushtimarg wrote 1 year ago: चिरजीयो होरी को रसिया चिरजीयो। ज्यों लो सूरज चन्द्र उगे है, तो लों ब्रज में तुम बसिया चिरजीयो ॥१॥ नि … more →

Tags: सूरदास जी

कान्हा पिचकारी मत मार मेरे घर सास लडेगी रे

pushtimarg wrote 1 year ago: कान्हा पिचकारी मत मार मेरे घर सास लडेगी रे। सास लडेगी रे मेरे घर ननद लडेगी रे। सास डुकरिया मेरी बडी … more →

Tags: घासीराम जी

श्यामा श्याम सलोनी सूरत को सिंगार बसंती है

pushtimarg wrote 1 year ago: श्यामा श्याम सलोनी सूरत को सिंगार बसंती है। सिंगार बसंती है …हो सिंगार बसंती है। मोर मुकुट की … more →

Tags: घासीराम जी

आज बिरज में होरी रे रसिया

pushtimarg wrote 1 year ago: आज बिरज में होरी रे रसिया। होरी रे होरी रे बरजोरी रे रसिया। घर घर से ब्रज बनिता आई, कोई श्यामल कोई ग … more →

फाग खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद किशोर।

pushtimarg wrote 1 year ago: फाग खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद किशोर। घेर लई सब गली रंगीली, छाय रही छबि छटा छबीली, जिन ढोल मृदंग … more →

Tags: घासीराम जी

होरी खेली न जाय

pushtimarg wrote 1 year ago: नैनन में पिचकारी दई, मोहे गारी दई, होरी खेली न जाय। क्यों रे लंगर लंगराई मोसे कीनी, केसर कीच कपोलन द … more →

फागुन में रसिया घर बारी फागुन म

pushtimarg wrote 2 years ago: फागुन में रसिया घर बारी फागुन में । हो हो बोले गलियन डोले गारी दे दे मत वारी ॥ लाजधरी छपरन के ऊपर आप … more →

मृगनैनी नार नवल रसिया

pushtimarg wrote 2 years ago: मृगनैनी नार नवल रसिया । जाके बडे बडे नैन में कजरा सोहे जाकी टेढी सी नजर मेरे मन बसिया ॥ जाके नवरंगी … more →

ब्रजमंडल देस दिखाओ रसिया

pushtimarg wrote 2 years ago: ब्रजमंडल देस दिखाओ रसिया ब्रजमंडल । तिहारे बिरज में मोर बहुत हैं, कूंकत मोर फटे छतिया ॥ तिहारे बिरज … more →

वृंदावन खेल रच्यो भारी

pushtimarg wrote 2 years ago: वृंदावन खेल रच्यो भारी वृंदावन । वृंदावन की गोरी नारी टूटी हार फटे सारी ॥ ब्रज की होरी ब्रज की गारी … more →

बडे भाग से फागुन आयो री

pushtimarg wrote 3 years ago: होरी खेलूँगी श्याम संग जाय, सखी री बडे भाग से फागुन आयो री ॥१॥ फागुन आयो…फागुन आयो…फागुन … more →


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