रसिया को नार बनावो री रसिया को। कटि लहंगा गल माल कंचुकी, वाको चुनरी शीश उढाओ री।रसिया को॥१॥ बाँह बडा बाजूबंद सोहे, वाको नकबेसर पहराओ री ।रसिया को ॥२॥ लाल गुलाल दृगन बिच काजर, वाको बेंदी भाल लगावो री ।… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: रसिया को नार बनावो री रसिया को। कटि लहंगा गल माल कंचुकी, वाको चुनरी शीश उढाओ री।रसिया को॥१॥ बाँह बडा … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: मत मारे दृगन की चोट रसिया होरी में, मेरे लग जायेगी। मैं तो नारी बडे बडे कुल की, तुम में भरी बडी खोट। … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: चिरजीयो होरी को रसिया चिरजीयो। ज्यों लो सूरज चन्द्र उगे है, तो लों ब्रज में तुम बसिया चिरजीयो ॥१॥ नि … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: कान्हा पिचकारी मत मार मेरे घर सास लडेगी रे। सास लडेगी रे मेरे घर ननद लडेगी रे। सास डुकरिया मेरी बडी … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: श्यामा श्याम सलोनी सूरत को सिंगार बसंती है। सिंगार बसंती है …हो सिंगार बसंती है। मोर मुकुट की … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: आज बिरज में होरी रे रसिया। होरी रे होरी रे बरजोरी रे रसिया। घर घर से ब्रज बनिता आई, कोई श्यामल कोई ग … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: फाग खेलन बरसाने आये हैं, नटवर नंद किशोर। घेर लई सब गली रंगीली, छाय रही छबि छटा छबीली, जिन ढोल मृदंग … more →
pushtimarg wrote 1 year ago: नैनन में पिचकारी दई, मोहे गारी दई, होरी खेली न जाय। क्यों रे लंगर लंगराई मोसे कीनी, केसर कीच कपोलन द … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: फागुन में रसिया घर बारी फागुन में । हो हो बोले गलियन डोले गारी दे दे मत वारी ॥ लाजधरी छपरन के ऊपर आप … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: मृगनैनी नार नवल रसिया । जाके बडे बडे नैन में कजरा सोहे जाकी टेढी सी नजर मेरे मन बसिया ॥ जाके नवरंगी … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: ब्रजमंडल देस दिखाओ रसिया ब्रजमंडल । तिहारे बिरज में मोर बहुत हैं, कूंकत मोर फटे छतिया ॥ तिहारे बिरज … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: वृंदावन खेल रच्यो भारी वृंदावन । वृंदावन की गोरी नारी टूटी हार फटे सारी ॥ ब्रज की होरी ब्रज की गारी … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: होरी खेलूँगी श्याम संग जाय, सखी री बडे भाग से फागुन आयो री ॥१॥ फागुन आयो…फागुन आयो…फागुन … more →