यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको तेरे सिवा कुछ होश नहीं है मुझको ना जाने कितने अजनबी गुज़रे हैं मेरे इस जिस्म की गीली मिट्टी से किसी ने कभी न छुआ ऐसे मुझे जिस तरह से छुआ है तूने मुझको मैं बहुत भटका ह… more →
तख़लीक़-ए-नज़रkmuskan wrote 6 months ago: दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां … more →
विनय wrote 10 months ago: यह मुनासिब नहीं मैं भुला दूँ तुझको तेरे सिवा कुछ होश नहीं है मुझको ना जाने कितने अजनबी गुज़रे हैं मेर … more →
विनय wrote 1 year ago: प्यार ज़िन्दगी को बदल देता है उड़ जाये होश खो जाये दिल कुछ ऐसा काम कर जाता है मेरे सपनों में कोई आने … more →
विनय wrote 1 year ago: अब होश नहीं रहता क्या करता हूँ कभी जीता हूँ तो कभी मरता हूँ आने वाले ने इतनी देर लगायी है मैं तो अब … more →