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सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

हो गए इम्तिहान बहुत7 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: देखे हैं इन्सान बहुत सब ही हैं हैरान बहुत ऐ ख़ुदा अब बस भी कर दे हो गए इम्तिहान बहुत कुछ रातें अब भूख … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, apr 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो ज़हन में जो ले रहीं उन करवटों की बात हो आओ बोलें प्यार के इख़ला … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, एक, पल, में, ही, हज़ारों, मुद्दतों

ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहराये जहां दास्तान हो जाओ बेखबरी के आलम से मुल्क लरज़ाया सा है टि … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

मोहब्बत रुकी हो तो मय्यत उठा लो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, NOV 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों

Rohit Jain wrote 1 year ago: इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

जो हो चुका वो कभी इंतेहा नहीं होता

Rohit Jain wrote 1 year ago: हर तराशा हुआ बुत ख़ुदा नहीं होता हर आँख में दिल का आईना नहीं होता रही होंगी शायद कोई मजबूरियां उसकी व … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल से आज दिल का फ़ासला हो गया मै ज़िंदगी से और आशना हो गया दोस्तों का इखलास परखने जो चला मै दुश्मनों … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Jun 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया

Rohit Jain wrote 1 year ago: कह कह कर तुझ पर ग़ज़ल मै मीर हो गया मसला दिल का ऐसा उलझा कश्मीर हो गया वो आये मेरे करीब तो यारों यूँ ल … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, JAN 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain


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