हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं मोहब्बत के ये सिलसिले ख़्वाब हैं आँखें हैं हैरां है दिल भी परेशां क्या यादों के ये बुलबुले ख़्वाब हैं बहुत भीड़ है फ़िर भी तन्हा खड़ा हूँ क्या दुनिया के ये काफ़िले ख़्वाब है… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: हौंसले ख़्वाब हैं फ़ासिले ख़्वाब हैं मोहब्बत के ये सिलसिले ख़्वाब हैं आँखें हैं हैरां है दिल भी परेशां क … more →