हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वाले शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००३ … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वा … more →
विनय wrote 1 year ago: जब-जब चाँद को छूना चाहा है मैंने बादलों के साये उसको दूर ले गये मैं अब कि ऐसा मौसम बनाऊँगा बादलों के … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ाबों में रंग भरना शौक़ नहीं सवालों का जवाब मौत नहीं उम्र का जाम पिलाये जा साक़ी यह जाम है कोई ख़ाब न … more →