तन्हाई की ऐसी आदत हो गई है कि महफ़िल से डर लगता है किसी के जाने से तो कभी ना डरे पर किसी के आने की आहट से भी डर लगता है… more →
कुछ िदल सेkmuskan wrote 11 months ago: तन्हाई की ऐसी आदत हो गई है कि महफ़िल से डर लगता है किसी के जाने से तो कभी ना डरे पर किसी के आने … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ना जाने कया सोचकर िदल की बातो को कागज पर उतार िदया। पर अगले ही पल ना जाने कयू कागज फाड िदया। काश िजं … more →
kmuskan wrote 1 year ago: इक औरत की िजंदगी गुजर जाती ह,ै मुिशकलो से जुझने मे कभी अपने हक के िलए तो, कभी अपने आसिततव के िलए कभी … more →