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Blogs about: क़तरा

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क्यों बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता3 comments

विनय wrote 1 year ago: क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता क्यों? मुझे बेक़रारियों से क़रार नहीं मिलता क्यों? ढल रहा हूँ दि … more →

Tags: मेरी नज़्म, ज़हन, इश्क़, Love, Mind, प्यार, कोशिश, मोहब्बत, क़रार

तुम न समझोगे2 comments

विनय wrote 1 year ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो च … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, चाँद, इश्क़, Heart, Love, Moment, तन्हाई, दिल, प्यार

कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त

विनय wrote 1 year ago: कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ तक न गिरा अबकि हारे तो टूट जाये ‘नज़र’ मेरे दिलसित … more →

Tags: रुबाइयाँ, वक़्त, इश्क़, Love, time, प्यार, नाम, मोहब्बत, name

क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ

Rohit Jain wrote 1 year ago: क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ तेरी आँच में मै जल रहा हूँ सहमा सहमा और धीरे धीरे बर्फ़ की मानिंद गल रहा हूँ अ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, JAN 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

शीशाए-अश्क आते रहे

विनय wrote 1 year ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे लोग आते-जाते रहे हम रखते … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, दर्द, Blame, Friendship, Pain, दीवाना, मीठी, बेवजह

क़तरा-क़तरा गलायेगा मेरे दिल को1 comment

विनय wrote 2 years ago: आज महसूस किया मैंने गर तुम्हें किसी और के साथ देखूँ तो मेरे दिल पे क्या गुज़रेगी कैसा महसूस करूँगा बा … more →

Tags: मेरी नज़्म, महसूस, इश्क़, दर्द, Love, डर, प्यार, मोहब्बत, Pain


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