इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना खुशी है ज़िंदगी जीने की सज़ा आज दोस्तों जो लब्ज़ उसके वास्ते निकले थे एक दिन वो लब्ज़ बन गये हैं दुआ आज … more →
इक शायर अंजाना सा...रवि कुमार, रावतभाटा wrote 8 months ago: मैं ख़ुदाओं के बीच सो रहा (a poem by ravi kumar, rawatbhata) उसने मुझसे ख़ुदा के नूर के बारे में पूछा … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना … more →