इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं दीजिए अगर आपको इल्ज़ाम देने हैं और कौन दूसरा सितम-परस्त होगा इतना आपकी न पर भी मुझे पयाम देने हैं आपकी नीम-नज़र देती है मुझको सौ ग़ालियाँ बावजूद इसके मुझे सौ सलाम … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं दीजिए अगर आपको इल्ज़ाम देने हैं और कौन दूसरा सितम-परस्त होगा … more →