हाय री मानवता ! तू कहां खो गयी ? कितना ढ़ूंढ़ा तुझे ? पर तू तो गुम हो गयी। तुझे ढ़ूंढ़ते ढ़ूंढते तुझ विहीन घूमते घूमते साक्षात्कार हुआ झूठ से, लूट से, भ्रष्टाचार से, अत्याचार से, पर तू तो खो गयी, मानो स्वर… more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: हाय री मानवता ! तू कहां खो गयी ? कितना ढ़ूंढ़ा तुझे ? पर तू तो गुम हो गयी। तुझे ढ़ूंढ़ते ढ़ूंढते तुझ विही … more →
Tags: भावांजलि, मानवता, साक्षात्कार, लूट, अत्याचार, भ्रष्टाचार
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