ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहराये जहां दास्तान हो जाओ बेखबरी के आलम से मुल्क लरज़ाया सा है टिके जिस पे वो संगेआस्तान हो जाओ अगर निगाह में बस खार नज़र आते हैं खिलाओ गुल और गुलसितान हो जाओ मिली वि… more →
इक शायर अंजाना सा...रविकुल wrote 1 month ago: दिल की ज़मीं पर जज़्बातों को दिल के मैंने, तुमसे अभी कहा नहीं है ! नाम तेरा दिल की ज़मीं , पर मैंने अभ … more →
विनय wrote 1 year ago: वह कब आयेगी जो मुझे चाहेगी जिसका इंतिज़ार करता हूँ यारा जिसके लिए फिरता हूँ मारा-मारा वह कब आयेगी जो … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने आसमाँ से टूटके गिरते सितारे को ज़मीं पे आते देखा है आसमाँ पे था तो चमकता था ज़मीं पे है तो दहकता … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहराये जहां दास्तान हो जाओ बेखबरी के आलम से मुल्क लरज़ाया सा है टि … more →
विनय wrote 1 year ago: इक चाँद है आसमाँ में रोशन-रोशन दिल में है हर पल इक तड़पन सुन रहा हूँ दीवाने दिल की धड़कन चाँद जो वह … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से दिल मिले दिल से दिल ख़ाबों के गुल खिले ख़ाबों के गुल क़दमों के नीचे से सरकी ज़मीं मुहब्बत की ज़म … more →
विनय wrote 1 year ago: आज फिर धुँधले बादलों के पार देखा चाँद, सुनहरा चाँद… आज फिर तेरी याद आयी, आज फिर मेरा जिस्म महक … more →
विनय wrote 1 year ago: एक बार देखा था तुझे हाथों में चिराग़ लिए चौखट पर खड़ी थी चाँद की निगाहें तुझ पर टिकी थीं सारी ज़मीं नव … more →