Blogs about: ज़हन

क्यों बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता3 comments

विनय wrote 1 year ago: क्यों? बेशर्म क़तरा-क़तरा ज़हन नहीं ढलता क्यों? मुझे बेक़रारियों से क़रार नहीं मिलता क्यों? ढल रहा हूँ दि … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Love, Mind, प्यार, कोशिश, मोहब्बत, क़रार, टुकड़े

वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ3 comments

विनय wrote 1 year ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, दर्द, तख़लीक़, Heart, Love, haze, Mind, तन्हाई

खिले इस तरह तेरे रंग और रूप

विनय wrote 1 year ago: खिले इस तरह तेरे रंग और रूप जैसे सर्दियों की भीनी-भीनी धूप अब यह आलम है दिलो-ज़हन का करता हूँ हर शै म … more →

Tags: रुबाइयाँ, रंग, धूप, भीनी, आलम, महसूस, इश्क़, Love, Mind


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