ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार की अदा मैं भी जानता हूँ कितना मन मुकद्द… more →
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार क … more →
Tags: मेरी ग़ज़ल, Mind, शिकार, राज़, अदा, मन, निहाँ, Hidden, secret
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