Blogs about: ज़हर

निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में

विनय wrote 1 year ago: निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में ज़्यादा को इक रोज़ ज़हर होना था अब तू ही बता, मैं तुझसे जुदा किधर जाऊँ … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, इश्क़, Love, जुदा, प्यार, मोहब्बत, मरासिम, pure, Poison

जिसे दवा जाना वह भी ज़हर निकला1 comment

विनय wrote 1 year ago: जिसे दवा जाना वह ज़हर निकला वह कि मेरा क़फ़न उड़ाकर निकला दो उंगलियों में मुझे यूँ मसला उसने मेरे दिल स … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, डर, दवा, दिल, प्यार, मुख़्तसर, मोहब्बत, लम्हा

मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा

विनय wrote 1 year ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों उसे दिनो-दोपहर ढूँढ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, बाज़ार, शाम

ज़हर पीकर जीने चले2 comments

विनय wrote 1 year ago: ज़हर पीकर जीने चले कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले आँसू सूखे हुए थे पलकों से बरसते हैं सितारे सारी रात चाँ … more →

Tags: मेरा गीत, ज़िन्दगी, चाँद, इश्क़, Love, पलाश, आइना, प्यार, मोहब्बत

यह शाम की धूप

विनय wrote 1 year ago: कोई हमसायादार पेड़ नहीं मिला ज़हर मिले तो ज़हर भी खा लूँ यह शाम की धूप बहुत कड़ी है… शायिर: विनय … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, ज़िन्दगी, धूप, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, शाम, Life

जन्नत में न लगा जी

विनय wrote 1 year ago: जब तक तेरी तमन्ना करेंगे जीते जायेंगे वरगना दम तोड़ देंगे मर जायेंगे तुमने जो कहा तो मर भी जाना है ह … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, चाह, Heart, Love, गुल, दिल, ख़ुशबू, Heaven, तमन्ना


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