मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है किस किस को मैने पुकारा नहीं है निकलता हूँ घर से तो ये सोचता हूँ वो क्या कर्ज़ है जो उतारा नहीं है हर इक अपने साहिल पे पहुँचा हुआ है कश्ती को मेरी ही किनारा नहीं है सभी खुश… more →
इक शायर अंजाना सा...रवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 month ago: अच्छा लगता है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) अच्छा लगता है बच्चों को खिलखिलाते देखना समन्दर को … more →
Amarjeet Singh wrote 4 months ago: धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ … more →
kmuskan wrote 9 months ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जान … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ठंडी हवा का एक झोका गुजरा, जैसे मेरा यार मुस्कुराता हुआ गुजरा, दिल मे मेरे एक उदासी सी छाई, तकदीर मु … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक पल सुखी एक पल दुखी, दो घड़ी कुछ इस तरह बीत चली, ज़िंदगी जैसे मुझसे रूठ चली, एक पल अपना एक पल पराया … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: क्या कहूँ उसे? लगे परियों सी सुंदर वो, कभी लगे नटखट गुडिया वो, कभी वो हँसाती कभी रुलाती, रोता देख वो … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर, मंजिल का है पता मुझे, रास्ते का भी पता मुझे, पहुच जाऊंगा वक्त पर, ह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है किस किस को मैने पुकारा नहीं है निकलता हूँ घर से तो ये सोचता हूँ वो क्य … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जा … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी लम्हों में सिमट जायेगी ऱूह टुकड़ों में जो बँट जायेगी आज फ़िर तन्हाई साथ लायी उन्हे आज फ़िर नींद … more →
विनय wrote 1 year ago: एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम हर लम्ह … more →