Blogs about: ज़िंदगी

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सूरज को डूबते देखना कोई सुंदर दृश्य नहीं हो सकता11 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 1 month ago: अच्छा लगता है (a poem by ravi kumar, rawatbhata) अच्छा लगता है बच्चों को खिलखिलाते देखना समन्दर को … more →

Tags: कविताएं, सूरज, दरख़्त

धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो2 comments

Amarjeet Singh wrote 4 months ago: धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो वो सितारा है चमकने दो यूँ … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh, Non Films, Sajda, घटाओं में नहा, जगजीत सिंह

जाने वो पल कहाँ खो गए8 comments

kmuskan wrote 9 months ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प … more →

Tags: Zindagi, Kavita, muskan, hindi, Poetry, kala, Blogroll, पल, चाँद

रिंद जो मुझको समझते हैं2 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जान … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Eternity, Ghazal, Jagjit Singh, Live Concert, Abdul Hameed, Adam

ठंडी हवा का एक झोका गुजरा...

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ठंडी हवा का एक झोका गुजरा, जैसे मेरा यार मुस्कुराता हुआ गुजरा, दिल मे मेरे एक उदासी सी छाई, तकदीर मु … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, amarjeet singh, अदाएँ, अमर, अमरजीत, उदासी, चाँद

एक पल सुखी एक पल दुखी...2 comments

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक पल सुखी एक पल दुखी, दो घड़ी कुछ इस तरह बीत चली, ज़िंदगी जैसे मुझसे रूठ चली, एक पल अपना एक पल पराया … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, प्यार, याद, अदाएँ

क्या कहूँ उसे...1 comment

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: क्या कहूँ उसे? लगे परियों सी सुंदर वो, कभी लगे नटखट गुडिया वो, कभी वो हँसाती कभी रुलाती, रोता देख वो … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, परियों, रुलाती, हँसाती

चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर...

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चल पड़ा हूँ फिर उन्ही रास्तों पर, मंजिल का है पता मुझे, रास्ते का भी पता मुझे, पहुच जाऊंगा वक्त पर, ह … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, रास्तों, मंजिल, साथी

मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है किस किस को मैने पुकारा नहीं है निकलता हूँ घर से तो ये सोचता हूँ वो क्य … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Jan 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जा … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Dec 2007, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

ज़िंदगी लम्हों में सिमट जायेगी

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी लम्हों में सिमट जायेगी ऱूह टुकड़ों में जो बँट जायेगी आज फ़िर तन्हाई साथ लायी उन्हे आज फ़िर नींद … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Jul 2007, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

एक मेरा सपना तू ही तो थी2 comments

विनय wrote 1 year ago: एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम हर लम्ह … more →

Tags: मेरा गीत, All alone, इंतिज़ार, ख़ुशबू, गुल, तन्हा, दिन, नाम, बेग़ाना


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