क्या है, क्यों है, कैसे है सोचता था जब पाया तो बहुत खुश हुआ उसके बाद क्या ? पाया, वो मिल गया अब कहाँ, किधर, किसको ढूँढना, चाहत, प्यास, होड़, जिद्द -लक्ष्य के अनेक रूप है पर मैंने एक नया रूप पाया -अलक्… more →
Nitin Jalanmequitnever wrote 2 months ago: क्या है, क्यों है, कैसे है सोचता था जब पाया तो बहुत खुश हुआ उसके बाद क्या ? पाया, वो मिल गया अब कहाँ … more →
mequitnever wrote 6 months ago: आज मैं अपने डेस्क को ठीक कर रहा था और कहीं कोने से मेरे हाथ एक फोल्डर लगा | उस फोल्डर में रंगीन कगाज … more →
mequitnever wrote 7 months ago: चलाचल हूँ मैं एक अंधेर नगरी को ढुँढता हूँ रौशनी दम घुटता है कुछ अच्छा नहीं लगता पर चलना है , गुजरना … more →
mequitnever wrote 9 months ago: After breathing for 22 years 8 months 2 weeks 5 days 9 hours 17 minutes and counting, I realized, af … more →
mequitnever wrote 9 months ago: असत्याभास एक जवलामुखी है | फुंटता क्यों नहीं | कब तक यह आग की ठंडक मुझे सुजाती रहेगी | एक बार जल जाओ … more →
mequitnever wrote 9 months ago: आज अचानक आभास हो आया है कि सब निरर्थक है | मैं कहाँ हूँ – किधर को जा रहा हूँ – पता न … more →