Blogs about: ज़िन्दगी
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जब कभी मैंने साँस ली
जब कभी मैंने साँस ली साथ तेरे नाम की फाँस ली पहरों नाराज़ थे ख़ुद से आज गुज़रे ह… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
जब कभी मैंने साँस ली
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: जब कभी मैंने साँस ली साथ तेरे नाम की फा … more »
तुम मेरे हो
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम मेरे हो, मेरे ही मेरे हो कितनी हों द … more »
फिर जी लूँ एक बार
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Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 month ago: चल पड़े हम अपने रास्ते, मैं इधर, तुम उस ओ … more »
आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं … more »
वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मु … more »
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »
कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले कभी ते … more »
कभी यूँ भी होता है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कभी यूँ भी होता है ज़िन्दगी मिलती है खो … more »
किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी फिर हल्की- … more »
दिले-सहरा में यह कैसा सराब है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: दिले-सहरा में यह कैसा सराब है ज़ख़्म मव … more »
यह कैसा लम्हा है
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: यह कैसा लम्हा है यह कैसा एहसास है तू पल … more »
उड़ते हुए दिन, दबी हुई रातें
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: उड़ते हुए दिन, दबी हुई रातें सीने में ब … more »
तन्हाई मिटाने दो
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तन्हाई मिटाने दो किस्से सुनाने दो सुब … more »
मैं उससे मोहब्बत करता था
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं उससे मोहब्बत करता था आज भी करता हू … more »
ज़हर पीकर जीने चले
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ज़हर पीकर जीने चले कच्चे-पक्के ज़ख़्म सी … more »
ख़ुदा ने जब किसी को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़ुदा ने जब किसी को न कहा अपना ख़ुदा फि … more »
ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ … more »
उफ़! यह छाँव की उमस
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: उफ़! यह छाँव की उमस तौबा यह झूठे फ़साने उम … more »
अंगीठी में सुलगता कोयला
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: अंगीठी में सुलगता कोयला झलोगे तब जाकर … more »
