ज़ियाँ दिल का किया जो तुमसे लगाया तो पल-पल सीने में धड़कता क्या है? तेरी आरज़ू मुझे कहाँ बहा ले जा रही है? ज़ियाँ = loss शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००४… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: ज़ियाँ दिल का किया जो तुमसे लगाया तो पल-पल सीने में धड़कता क्या है? तेरी आरज़ू मुझे कहाँ बहा ले जा रही … more →