Blogs about: ज़ीस्त

वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा3 comments

विनय wrote 1 year ago: वज़नी साँसों में पिस रहा है दिन सारा मुझे आज भी है इन्तिज़ार तुम्हारा नम है नफ़स-नफ़स मेरे सीने में क्यो … more →

Tags: मेरा गीत, ज़िन्दगी, इश्क़, Love, Moment, प्यार, क़िस्मत, मोहब्बत, साँस

ख़लिश को जगह न दो दिल में2 comments

विनय wrote 1 year ago: ख़लिश को जगह न दो दिल में नासूर बन जायेगी मरहम भी न लगा पाओगे साँस घुट के मर जायेगी ज़ीस्त अलग है, ज़ी … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, साँस, मरहम

जो होता है भले के लिए होता है

विनय wrote 1 year ago: जो होता है भले के लिए होता है ख़ुद को समझने के लिए होता है इंसान की आदत है बदल जाना कि वह बदलने के ल … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, वक़्त, इश्क़, हिसाब, Love, time, प्यार, आदत

राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में

विनय wrote 1 year ago: राहें क्या-क्या न आयेंगी इस दौरे-बदनामी में है अपना ही मज़ा घुटके मरने का ग़ुमनामी में मुझको गले से लग … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, दर्द, Love, time, प्यार, मोहब्बत, Pain, राहें

कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब

विनय wrote 1 year ago: कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब दामने-ग़म में लौट गयी ख़िज़ाँ अब देखो उस रात पर शिगाफ़ आने लग गये असरका … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, ग़म, मोहब्बत, रात

नज़र बचते बचाते लड़ ही गयी

विनय wrote 1 year ago: नज़र   बचते   बचाते   लड़   ही   गयी मय उन आँखों की हमें चढ़ ही गयी पूछो ज़रा गुलपोश से वह कहाँ है आज … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, Reminisce, प्यार, मोहब्बत, नज़र, desire, तस्व्वुर

और इक आह की ख़लिश देती है

विनय wrote 1 year ago: रूह बहुत बेक़रार’ बहुत बेकल है इस जिस्म से छुटकारा चाहती है अगर तुम न मिली मुझको… यह बेक़र … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, गिरह, Love, eyes, प्यार, मोहब्बत, Pain, धड़कन


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