विनय wrote 1 year ago: कैसी फ़रियाद, कैसा नाला हम क़ैसो-फ़रहाद नहीं हम हैं ख़ुदा से, ख़ुदा हमसे सिवाय इसके कुछ याद नहीं शायिर: … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →
विनय wrote 1 year ago: जब कभी वह शाम मुझे याद आयी मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी माना आज शाम का वह रंग नहीं और मेरी जान त … more →