रचना: आग़ा हश्र स्वर: फ़रीदा ख़ानुम तुम और फ़रेब खाओ बयान-ए-रक़ीब से तुम से तो कम गिला है ज़ियादा नसीब से बरबाद-ए-दिल का आख़िरी सरमाया थी उम्मीद वो भी तो युम ने छीन लिया मुझ ग़रीब से गोया तुम्हारी याद ही मेरा… more →
निंदा पुराणअंकुर वर्मा wrote 1 year ago: स्वर: फ़रीदा ख़ानुम सजन लागी तोरी लगन मन मा लाज मोहे आये हाय रे हाय लगायी तेने कैसी लगन मन मा हर आहट … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: स्वर: उस्ताद अमानत अली ख़ान और फ़रीदा ख़ानुम फूल-फूल ने ली अंगड़ाई कली-कली मुस्काई मिलन रुत आई… गुलशन-गु … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: सूफ़ी ग़ुलाम मुस्तफ़ा तबस्सुम स्वर: फ़रीदा ख़ानुम ये क्या के एक जहाँ को करो वक़्फ़-ए-इज़्तराब ये क्या … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: सूफ़ी ग़ुलाम मुस्तफ़ा तबस्सुम स्वर: फ़रीदा ख़ानुम वो मुझसे हुये हमकलाम अल्लाह अल्लाह कहाँ मैं कहाँ … more →