Blogs about: फ़िज़ा
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धुँधलियाँ
धुँधलियाँ-धुँधलियाँ तेरी यादों की धुँधलियाँ छायी हैं ज़हन पर तेरी बातों की ब… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
धुँधलियाँ
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विनय प्रजापति wrote 1 week ago: धुँधलियाँ-धुँधलियाँ तेरी यादों की धु … more »
आँखों में आँसू नहीं आते
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आँखों में आँसू नहीं आते क्योंकि मैं जा … more »
नग़मे खिलने लगे हैं
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »
माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: माहे-कामिल कहूँ कि शाहे-ख़ुदा कहूँ हुस … more »
वह मौसम इक बार
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह मौसम इक बार फिर सजा दे प्यार करने की … more »
टूटे हुए चाँद को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »
हाल दिल का बताना तुमसे
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: हाल दिल का बताना तुमसे बहुत ही मुश्किल … more »
रोते हैं सब से छिपकर
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जब-जब सनम तेरी यादें आती हैं कैसे कहें … more »
यह यादें तो ऐसी हैं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं ज … more »
दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे
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विनय प्रजापति wrote 3 months ago: दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे क़दमो … more »
यह रंगीन फ़िज़ा
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विनय प्रजापति wrote 3 months ago: यह रंगीन फ़िज़ा बेरंग दिख रही है सावन की … more »
दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत … more »
अब 'विनय' तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: अब ‘विनय’ तेरे ग़म से ग़ाफ़िल नहीं रहा दे … more »
