तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने में दर्द है तो सही… लम्हा-लम्हा जज़्बात पिघलते हैं ग़म की चिंगारियों में, एहसास उबलते हैं मेरे, ख़्याल मसलते हैं मुझे… इक भँवर है आँखों में माज़ी का मुझको … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: तुम्हें महसूस हो कि ना हो मेरे सीने में दर्द है तो सही… लम्हा-लम्हा जज़्बात पिघलते हैं ग़म की चि … more →