जबीने-माह पर गेसू की लहर याद आती है वह गुलाबी ख़ुशरंग शामो-सहर याद आती है जिसने हमें ज़िन्दगी का दीवाना कर दिया वह उसकी क़ातिल तीरे-नज़र याद आती है एक शाल में लिपटी बैठी रहती थी जब तुम वह सर्दियों की गर्… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जबीने-माह पर गेसू की लहर याद आती है वह गुलाबी ख़ुशरंग शामो-सहर याद आती है जिसने हमें ज़िन्दगी का दीवा … more →
विनय wrote 1 year ago: कोंपलें हर शाख़ बनी पत्तियाँ अब दामने-ग़म में लौट गयी ख़िज़ाँ अब देखो उस रात पर शिगाफ़ आने लग गये असरका … more →