ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा ढ़ूंढ़ना है जो ख़ुदा तो ग़मज़दों में पायेगा जब उस ख़ुदा ने अर्श को और फ़र्श को बांटा नहीं फिर चैन कैसे आदमी इन सरहदों में पायेगा घर में जाके देख तो बच्चे हैं कुछ … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा ढ़ूंढ़ना है जो ख़ुदा तो ग़मज़दों में पायेगा जब उस ख़ुदा ने अर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़मीन भी जाती रही और आसमान भी ना रहा पर कटे परिंदे में उड़ने का अरमान भी ना रहा पहले तो अपने होने का व … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: छोटी बहर में एक प्रयोग करने की गुस्ताख़ी की है आपकी अमूल्य टिप्पणी का मुंतज़िर हूँ…. =========== … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ो कहां जाने ये दिल दीवाना बिखरा नाकाम मै है इस से भी ग़ारत नहीं … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: तेरी तस्वीर है आँखों में फ़िर से नीर है आँखों में दिल में लगता है ख़वाब है इक ताबीर है आँखों में जिस स … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल मची है महफ़िल में क् … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी तन्हाई में मुझे कुछ दूर थाम लो तुम्हारे नाम से मुझको ज़माना जा … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो खून में अपने ही हम नहाये हुए न जाने मुझको हुआ कौन सा मक़ाम हास … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: खाली है जिनका दामन वो हिसाब क्या देंगे सब सवाल ही गलत हैं फिर जवाब क्या देंगे हर तरफ़ हर जगह हर इक शर … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं है जुस्तजू उस शख़्स की जो कभी हासिल नहीं वहम जाने ये मेरे इ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम कर के बोले सर को उठा लो हैं आँखों का काजल घटाओं सा फ़ैला कहीं … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते एक तकल्लुफ़ ही सही जिसको निभाते जाते क्या ख़ता थी के टूट गये ह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर ये सम … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुलाने का वक़्त आया है आओ बुझा दें पुरानी शम्मों को नई शम्में जलान … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपन … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अपनी ही क़ब्र को कभी खोला नहीं जाता क्या रंग सियासत ने दिया है ज … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कहाँ बदले मेरी नज़र की ख़ता थी उस ही की दीवारें ज़रा मजबूत नहीं थ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसाफ़िर हो कहीं रुकता है क्या हमने तुमको साँस में शामिल किया साँस … more →