Blogs about: 2007 A Poetic Journey

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ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में पायेगा4 comments

Rohit Jain wrote 2 weeks ago: ना मंदिरों में पायेगा ना मस्जिदों में … more »

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2007

रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं3 comments

Rohit Jain wrote 2 weeks ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देख … more »

Tags: मेरी गज़लें, Sep 2007

ना रहा1 comment

Rohit Jain wrote 1 month ago: ज़मीन भी जाती रही और आसमान भी ना रहा पर क … more »

Tags: मेरी गज़लें, Feb 2007

छोटी बहर में एक प्रयोग3 comments

Rohit Jain wrote 1 month ago: छोटी बहर में एक प्रयोग करने की गुस्ता … more »

Tags: मेरी गज़लें, Jul 2007

मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा1 comment

Rohit Jain wrote 2 months ago: मेरी ज़बां से मेरा ही अफ़साना बिखरा ढ़ूँढ़ … more »

Tags: मेरी गज़लें, Dec 2007

आँखों में

Rohit Jain wrote 2 months ago: तेरी तस्वीर है आँखों में फ़िर से नीर है … more »

Tags: मेरी गज़लें, Dec 2007

इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है

Rohit Jain wrote 2 months ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल क … more »

Tags: मेरी गज़लें, Dec 2007

ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो

Rohit Jain wrote 2 months ago: ज़िंदगी सियाह है ज़रा तुम नूर थाम लो भरी … more »

Tags: मेरी गज़लें, Dec 2007

चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए

Rohit Jain wrote 2 months ago: चले हैं आज ज़माने को आज़माये हुए ये देखो … more »

Tags: मेरी गज़लें, NOV 2007

क्या देंगे

Rohit Jain wrote 2 months ago: खाली है जिनका दामन वो हिसाब क्या देंगे … more »

Tags: मेरी गज़लें, NOV 2007

हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नहीं

Rohit Jain wrote 2 months ago: हूँ चल रहा उस राह पर जिसकी कोई मंज़िल नह … more »

Tags: मेरी गज़लें, NOV 2007

मोहब्बत रुकी हो तो मय्यत उठा लो2 comments

Rohit Jain wrote 2 months ago: मै सजदे में उनके कुछ यूँ झुका था वो शरम … more »

Tags: मेरी गज़लें, NOV 2007

तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते

Rohit Jain wrote 2 months ago: तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जात … more »

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2007

यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर

Rohit Jain wrote 2 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्स … more »

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2007

नया हुनर पाने का वक़्त आया है

Rohit Jain wrote 2 months ago: नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुला … more »

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2007

दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां

Rohit Jain wrote 2 months ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़- … more »

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2007

सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता

Rohit Jain wrote 2 months ago: सच शय है वो जिसको कभी बोला नहीं जाता अप … more »

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2007

वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी

Rohit Jain wrote 2 months ago: वो नहीं क़ातिल ये तो खंजर की ख़ता थी वो कह … more »

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2007

घर हवाओं में बना टिकता है क्या

Rohit Jain wrote 2 months ago: घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसा … more »

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2007


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