मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवाने से के अब उसे तो जल के ख़ाक ही हो जाना है जो तूने कह दिया तो तर्क़ेमोहब्ब्त कर ली जज़ा में अब भले ही ह… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 9 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: जाँ देके हमने दिल को सँभाला है यहाँ पर कुछ ऐसे उसकी याद को टाला है यहाँ पर अब सोचते हैं मौत में ही च … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: यही मंज़र यहाँ पे ताहद-ए-नज़र होंगे टूट के बिखरे से तूफ़ान में ये घर होंगे जो अभी उड़ रहा है देख आसमाँ म … more →
Rohit Jain wrote 10 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही श … more →
Rohit Jain wrote 11 months ago: फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये बूँद् में सागर छिपाकर देखिये कितना आसां है जहां को कोसना ख़ुद से ख़ुद को ही … more →
Rohit Jain wrote 12 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →
Rohit Jain wrote 12 months ago: हार जाने की कामरानी पर दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: बादलों ने करीं कुछ आसमाँ में साज़िशें हैं आजकल देखो तभी तो पत्थरों की बारिशें हैं ख़ुश्क़ गुमसुम और बिय … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: नया इक दिल जलाने का बहाना ढ़ूँढ़ लें आओ इन अश्क़ों के लिये कोई ठिकाना ढ़ूँढ़ लें आओ बड़ी मुद्दत से कोई भी … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं तबीब == He … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ गिरा है, मै यहां पर क्या गिरा है देख लूँ है लहू किसका ये उसका या मिरा है देख लूँ मै नहीं जाता था … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल जो टूटा तो बताओ के किधर जाओगे तुम भी इस राह में आखिर को बिखर जाओगे हद से हद ये ही मिलेगा मुझे चा … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कौन ये कश्ती ले उतरा तूफ़ान में इतना दम कब से आया इन्सान में वो देखता रह्ता है आसमां की तरफ़ कोई रहता … more →