Blogs about: 2008 A Poetic Journey

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मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है2 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →

Tags: मेरी गज़लें, DEC 2008, Rohit, jain, 2008, को, है, मेरे, यूँ

कोई सूरज हमारी ताक में है5 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, Nov 2008, में, रोहित, जैन, Rohit, jain, 2008, है

यहाँ पर4 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: जाँ देके हमने दिल को सँभाला है यहाँ पर कुछ ऐसे उसकी याद को टाला है यहाँ पर अब सोचते हैं मौत में ही च … more →

Tags: मेरी गज़लें, DEC 2008

यही मंज़र यहाँ पे ताहद-ए-नज़र होंगे5 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: यही मंज़र यहाँ पे ताहद-ए-नज़र होंगे टूट के बिखरे से तूफ़ान में ये घर होंगे जो अभी उड़ रहा है देख आसमाँ म … more →

Tags: मेरी गज़लें, DEC 2008

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल4 comments

Rohit Jain wrote 6 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही शे … more →

Tags: मेरी गज़लें, DEC 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये4 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: फूल पत्थर पर खिलाकर देखिये बूँद् में सागर छिपाकर देखिये कितना आसां है जहां को कोसना ख़ुद से ख़ुद क … more →

Tags: मेरी गज़लें, Nov 2008

मोहब्बत में1 comment

Rohit Jain wrote 7 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, Nov 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर5 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: हार जाने की कामरानी पर                दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →

Tags: मेरी गज़लें, Nov 2008, 2008, कविता, गज़ल, जैन, दास्तां, पर, पानी

शायद4 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो2 comments

Rohit Jain wrote 7 months ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →

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हज़ारों ख़्वाहिशें हैं1 comment

Rohit Jain wrote 8 months ago: बादलों ने करीं कुछ आसमाँ में साज़िशें हैं आजकल देखो तभी तो पत्थरों की बारिशें हैं ख़ुश्क़ गुमसुम और बिय … more →

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2008

ढ़ूँढ़ लें आओ7 comments

Rohit Jain wrote 8 months ago: नया इक दिल जलाने का बहाना ढ़ूँढ़ लें आओ इन अश्क़ों के लिये कोई ठिकाना ढ़ूँढ़ लें आओ बड़ी मुद्दत से कोई भी … more →

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2008

मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ7 comments

Rohit Jain wrote 8 months ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, Oct 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

सिलसिला गुनाह का1 comment

Rohit Jain wrote 8 months ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →

Tags: मेरी गज़लें, Sep 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

आप भी अजीब हैं3 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं                  तबीब == He … more →

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देख लूँ3 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: कुछ गिरा है, मै यहां पर क्या गिरा है देख लूँ है लहू किसका ये उसका या मिरा है देख लूँ मै नहीं जाता था … more →

Tags: मेरी गज़लें, Feb 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

तुम भी5 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: दिल जो टूटा तो बताओ के किधर जाओगे तुम भी इस राह में आखिर को बिखर जाओगे हद से हद ये ही मिलेगा मुझे चा … more →

Tags: मेरी गज़लें, Sep 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

यादें बिन आये भी जब6 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →

Tags: मेरी गज़लें, Sep 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

क्या क्या6 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: कौन ये कश्ती ले उतरा तूफ़ान में इतना दम कब से आया इन्सान में वो देखता रह्ता है आसमां की तरफ़ कोई रहता … more →

Tags: मेरी गज़लें, Sep 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008


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