वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी बढ़ गई ज़हर खाने के बाद इतना अंधा किया फ़ुरक़ते यार ने दिल जलाना पड़ा उसके जाने के बाद हुआ हाल ऐसा मे… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 2 months ago: वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी ब … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: तर्क़ेवफ़ा का दिल पे असर है रात कटी तो सहर का ड़र है बड़े शौक़ से फूँक चले हो सोच तो लेते किसी का घर … more →
Rohit Jain wrote 4 months ago: हो तेरी इनायत तो मोहब्बत निभा सकूँ दो फूल तेरी ज़ुल्फ़ में मै भी सजा सकूँ कैसा तेरा जादू है के तेरे … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: कोई होता नहीं है जान, जान कहने से ज़मीं ज़मीं ही रही आसमान कहने से झुलस तो अब भी रहा है मेरा ये जिस्म … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: ऐसा भी मोड़ आएगा सोचा नहीं था दोस्त तू भी मुझे रुलाएगा सोचा नहीं था दोस्त रक्खेगा तू ख़याल जो दिल दे द … more →
Rohit Jain wrote 5 months ago: एक पुराने दोस्त की बहुत याद आ रही थी ज़िंदगी ने जिससे जुदा कर दिया है… तो दिल के ख़यालों को ग़ज़ल … more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: तुमने बना दिया है मोहब्बत में क्या मुझे के घूर घूर देखता है ये जहां मुझे आँखों में अश्क़ दिल पे सलीबो … more →
Rohit Jain wrote 8 months ago: दिलकश मेरी रातें होती रहीं चाँद से मेरी बातें होती रहीं जिस तरह मिल रहे हैं ज़मीं आसमां उस तरह मुलाक़ा … more →
Rohit Jain wrote 8 months ago: कब जाने मोहब्बत में ये मक़ाम आ गया बजाय ख़ुदा लब पे तेरा नाम आ गया इसको अदा कहूँ के ये एहसान है तेरा त … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: आँख में आँसू भरे हैं दिल में ये जज़्बात हैं क्यों मेरे प्यारे वतन के दुख भरे हालात हैं कोई कुछ करता न … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: इश्क़ हमको मिला तो बनके इश्तिहार मिला नुमाइशों से भरा आपका किरदार मिला हर एक शख़्स यहां हमको बेक़रार मि … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: बात बेबात याद करते हैं भूलकर ज़ात याद करते हैं अश्क़ आँखों के रुक नहीं पाते लेके बरसात याद करते हैं ते … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: मेरे ख़ुदा इसे किसी काबिल बनाइये कुछ ग़म इसे भी दीजिये और दिल बनाइये कब तक मुग़ालते में रहूँ नाख़ुदा के … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: ग़मों ने बाँट लिया मुझको ख़ज़ाने की तरह बिखर गया हूँ हर गली में फ़साने की तरह मुझे कुछ इस तरह से ढ़ूँढ़ रह … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: आस बंधती है टूट जाती है ज़िंदगी खेल यूँ दिखाती है देख ज़ालिम के तेरे नाम से अब सारी दुनिया मुझे सताती … more →