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Blogs about: 2009 A Poetic Journey

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वो बहुत याद आए भुलाने के बाद8 comments

Rohit Jain wrote 2 months ago: वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी ब … more →

Tags: मेरी गज़लें, Sep, 2009, 2009, आए, कविता, के, गज़ल, जैन, बहुत

किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं 4 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों … more →

Tags: Aug, 2009, मेरी गज़लें, 2009, Aug., August, कविता, क़ज़ा, किसने, किसने बोला क़ज़ा से ड

तर्क़ेवफ़ा का दिल पे असर है3 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: तर्क़ेवफ़ा का दिल पे असर है रात कटी तो सहर का ड़र है बड़े शौक़ से फूँक चले हो सोच तो लेते किसी का घर … more →

Tags: मेरी गज़लें, Jul 2009

2 हमरदीफ़ ग़ज़लें 5 comments

Rohit Jain wrote 4 months ago: हो तेरी इनायत तो मोहब्बत निभा सकूँ दो फूल तेरी ज़ुल्फ़ में मै भी सजा सकूँ कैसा तेरा जादू है के तेरे … more →

Tags: मेरी गज़लें, Jul 2009

कोई होता नहीं है जान, जान कहने से6 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: कोई होता नहीं है जान, जान कहने से ज़मीं ज़मीं ही रही आसमान कहने से झुलस तो अब भी रहा है मेरा ये जिस्म … more →

Tags: मेरी गज़लें, Jul 2009

सोचा नहीं था दोस्त1 comment

Rohit Jain wrote 5 months ago: ऐसा भी मोड़ आएगा सोचा नहीं था दोस्त तू भी मुझे रुलाएगा सोचा नहीं था दोस्त रक्खेगा तू ख़याल जो दिल दे द … more →

Tags: मेरी गज़लें, Jul 2009

एक ख़ास दोस्त के लिये...6 comments

Rohit Jain wrote 5 months ago: एक पुराने दोस्त की बहुत याद आ रही थी ज़िंदगी ने जिससे जुदा कर दिया है… तो दिल के ख़यालों को ग़ज़ल … more →

Tags: मेरी गज़लें, May 2009

तुमने बना दिया है मोहब्बत में क्या मुझे6 comments

Rohit Jain wrote 6 months ago: तुमने बना दिया है मोहब्बत में क्या मुझे के घूर घूर देखता है ये जहां मुझे आँखों में अश्क़ दिल पे सलीबो … more →

Tags: मेरी गज़लें, May 2009

चाँद से मेरी बातें होती रहीं3 comments

Rohit Jain wrote 8 months ago: दिलकश मेरी रातें होती रहीं चाँद से मेरी बातें होती रहीं जिस तरह मिल रहे हैं ज़मीं आसमां उस तरह मुलाक़ा … more →

Tags: मेरी गज़लें, Mar 2009

कब जाने मोहब्बत में ये मक़ाम आ गया2 comments

Rohit Jain wrote 8 months ago: कब जाने मोहब्बत में ये मक़ाम आ गया बजाय ख़ुदा लब पे तेरा नाम आ गया इसको अदा कहूँ के ये एहसान है तेरा त … more →

Tags: मेरी गज़लें, Mar 2009

हालात-ए-मुल्क़2 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: आँख में आँसू भरे हैं दिल में ये जज़्बात हैं क्यों मेरे प्यारे वतन के दुख भरे हालात हैं कोई कुछ करता न … more →

Tags: मेरी गज़लें, Mar 2009

इश्क़ हमको मिला तो बनके इश्तिहार मिला7 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: इश्क़ हमको मिला तो बनके इश्तिहार मिला नुमाइशों से भरा आपका किरदार मिला हर एक शख़्स यहां हमको बेक़रार मि … more →

Tags: मेरी गज़लें, Mar 2009

बात बेबात याद करते हैं2 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: बात बेबात याद करते हैं भूलकर ज़ात याद करते हैं अश्क़ आँखों के रुक नहीं पाते लेके बरसात याद करते हैं ते … more →

Tags: मेरी गज़लें, Mar 2009

मेरे ख़ुदा इसे किसी काबिल बनाइये2 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: मेरे ख़ुदा इसे किसी काबिल बनाइये कुछ ग़म इसे भी दीजिये और दिल बनाइये कब तक मुग़ालते में रहूँ नाख़ुदा के … more →

Tags: मेरी गज़लें, Feb 2009

ग़मों ने बाँट लिया मुझको ख़ज़ाने की तरह15 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: ग़मों ने बाँट लिया मुझको ख़ज़ाने की तरह बिखर गया हूँ हर गली में फ़साने की तरह मुझे कुछ इस तरह से ढ़ूँढ़ रह … more →

Tags: मेरी गज़लें, jan. 2009

कोई शम्मा सी झिलमिलाती है4 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: आस बंधती है टूट जाती है ज़िंदगी खेल यूँ दिखाती है देख ज़ालिम के तेरे नाम से अब सारी दुनिया मुझे सताती … more →

Tags: मेरी गज़लें, jan. 2009


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