पश्चिमी विज्ञान मानव शरीर में स्थित जीन के आधार पर अपने विश्लेषण प्रस्तुत करता है जबकि यही विश्लेषण भारतीय दर्शन ‘गुण ही गुणों को बरतते हैं‘ के आधार पर करता है। पश्चिमी विश्लेषण मनुष्य के स्वभाव में उ… more →
*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तरुवर जड़ से काटिया, जबै तम्हारो जहाज तारे पर बोरे नहीं, बांह गाहे की लाज संत कबीर दास जी कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नूनं हि ते कविवरा विपरीत वाचो ये नित्यमाहुरबला इति कामिनीनाम् । याभिर्विलालतर तारकदृष्टिपातैः शक्रा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जेहि रहीम तन मन लियो, कियों हिए बिच भीन तासों दुख सुख कहन की, रही बात अब कौन कवि रहीम का कथन है कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.क्रोध यमराज के समान है, उसके कारण मनुष्य मृत्यु की गोद में चला जाता है। तृष्णा वैतरणी नदी की तरह ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पढी गुनी पाठक भये, समुझाया संसार आपन तो समुझै नहीं, वृथा गया अवतार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गारी ही सो उपजे, कष्ट और भीच हारी चले सो साधू हैं, लागि चले सो नीच संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जैसा भोजन खाइये, तैसा ही मन होय जैसा पानी पीजिये, तैसी वाणी होय संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं कि जैस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चाल बकुल की चलत हैं, बहुरि कहावैं हंस ते मुक्ता कैसे चुंगे, पडे काल के फंस संत शिरोमणि कबीरदास जीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.मन की शुद्ध भावना से यदि लकड़ी, पत्थर या किसी धातु से बनी मूर्ति की पूजा की जायेगी तो सब मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दोनों रहिमन एक से, जौ लौं बोलत नाहिं जान परत हैं काक पिक, ऋतू बसंत के माहिं कविवर रहीम कहते हैं कि ज … more →