आज के दौर में, ऐ दोस्त, ये मंजर क्यूं है, ज़ख्म हर सर पे, हर इक हाथ में, पत्थर क्यूं है, जब हकीकत है, के हर ज़र्रे में तू रहता है, फ़िर ज़मीं पर, कहीं मस्जिद, कहीं मन्दिर क्यूं है, अपना अंजाम तो मालूम है… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: आज के दौर में, ऐ दोस्त, ये मंजर क्यूं है, ज़ख्म हर सर पे, हर इक हाथ में, पत्थर क्यूं है, जब हकीकत है, … more →