आखो से यूं आंसू ढलके, सागर से जैसे मए छलके हम समझे मफ्हुम-ऐ-भरा, कोई आया भेष बदल के, काश बता सकते परवाने, क्या खोया, क्या पाया जलके मंजिल तक वो क्या पहुचा, जिसने देखि राह न चलके, … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: आखो से यूं आंसू ढलके, सागर से जैसे मए छलके हम समझे मफ्हुम-ऐ-भरा, कोई आया भेष बदल के, काश बता सकते पर … more →