न जाने क्यों वो ये कैसे सोच लेता है के उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है साथ होकर भी तरन्नुम-ए-खामोशी का साज़ हमे हरदम नागवारा लगता है कहेने को बीच में अनगिनत बातें राह देखती वो बस कभी आसमान को कभी … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: न जाने क्यों वो ये कैसे सोच लेता है के उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है साथ होकर भी तरन्नुम-ए-खामो … more →