mehhekk wrote 8 months ago: तुम हमे आज कल वैसे ही अच्छे लगते हो आधे अधूरे , हम तुम में अपनी भावनाए भर दे और तुम हम में जज़्बा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: न जाने क्यों वो ये कैसे सोच लेता है के उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है साथ होकर भी तरन्नुम-ए-खामो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मुक्ति 1. भोर की लालिमा मन में असीम भक्ति हाथों में पूजा थाल तुलसी की परिक्रमा मंत्रो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आज जाने की ज़िद्द ना करो लगता है जैसे अरसो पुरानी बात है गमो के साये सदा हमारे साथ है | तमस की वो बे … more →
mehhekk wrote 1 year ago: फ़िज़ा यूँ ही आज ख़याल आया , देखु रूप पलटकर कुछ पल महसूस करू , फ़िज़ा में बदलकर | फ़िज़ा बनकर मैं , … more →