Blogs about: Aastha

चमत्कार को नमस्कार, सहजता से कोई नहीं सरोकार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: इस प्रथ्वी पर जीवन अपनी सहज धारा से बहता जाता है। अनेक आपदायें इस प्रथ्वी पर आती हैं पर फिर सब कुछ स … more →

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संत कबीर वाणी:जीभ का रस सर्वोत्तम 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सहज तराजू आनि के, सब रस देखा तोल सब रस माहीं जीभ रस, जू कोय जाने बोल संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते है … more →

Tags: Blogroll, writing, dharam, sanskrati, संस्कार, भारत, साहित्य, हिंदी साहित्य, edcation

संत कबीर वाणी:पढ़ कर पत्थर और लिख कर ईंट होते लोग

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चतुराई क्या कीजिए, जो नहिं शब्द समाय कोटिक गुन सूवा पढै, अन्त बिलाई खाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कह … more →

Tags: aducation, arebic, आध्यात्म, आस्था, कबीर, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भाषा, शिक्षा

संत कबीर वाणी:जो सात्विक नहीं उसे संत नहीं कहा जा सकता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कबीर विषधर बहु मिलै, मणिधर मिला न कोय विषधर को मणिधर मिलै, विष तजि अमृत होय संत कबीर दास जी कहते है … more →

Tags: साहित्य, हिंदी साहित्य, arebic, edcation, समाज, bharat, web duniya, web dunia, E-patrika

संत कबीर वाणी:गाली से कलह, दु:ख और मृत्यु पैदा होती है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गारी ही सो उपजे, कष्ट और भीच हारी चले सो साधू हैं, लागि चले सो नीच संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते है … more →

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कल है पुरुष दिवस 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जायेगा। यह अपने आप में अजीब बात लगती है क्योंकि अभी तक तो पुरुष क … more →

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मनु स्मृति: राज्य के दण्ड से ही अनुशासन संभव

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हे … more →

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रहीम के दोहे:बुरे वक्त में राम का नाम ही सहायक1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को इहै हवाल तौ काहे  कर धरुयो, गोवर्धन गोपाल कविवर रहीम कहते हैं कि श्रीक … more →

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रहीम के दोहे: बिपति भए धन न रहे

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बिपति भए धन न रहे, रहे जो लाख करोड़ नभ तारे छिपि जात है, ज्यों रहीम भए भोर कवि रहीम कहते हैं, जैसे … more →

Tags: aducation, anugoonj, arebic, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, साहित्य, हिंदी साहित्य, हिन्दी

रहीम के दोहे:भक्त का मन तो भगवान् में ही रमता है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दादुर, मोर, किसान मन, लग्यो रहैं धन माहिं रहिमन चातक रटनि हूँ, सर्वर को कोऊ नाहिं कविवर रहीम कहते ह … more →

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जब फूलों को देखने के लिए पैसे देने होंगे

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अगर एक अखबार की खबर पर यकीन करें तो आगे चलकर प्रकृति को निहारने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे. … more →

Tags: Blogroll, writing, Dashboard, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, बिंब-प्रतिबिंब, हास्य व्यंग्य, आलेख

चाणक्य नीति:भावना से प्रतिमा में भी भगवान्

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.मन की शुद्ध भावना से यदि लकड़ी, पत्थर या किसी धातु से बनी मूर्ति की पूजा की जायेगी तो सब मे … more →

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चमत्कार का व्यापार होता है यहाँ

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह व्यंग्य रचना काल्पनिक तथा किसी व्यक्ति या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है ) देखो वही अपनी जिन्द … more →

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मुख, मुखौटा और सिंहासन

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मुखों की बैठक में सिंहासन पर मुखोटा रखने का मसला उठा था सबके चेहरे थे दागदार चुनाव के जुए में लोगो … more →

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देवराज इन्द्र ने कहा- चलते रहो, चलते रहो

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देवराज इंद्र द्वारा राजा हरिश्चन्द्र के पुत्र रोहित को उपदेश के रुप में संस्कृत में दिए गये श्लोक का … more →

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आधुनिक शिक्षा के साथ आध्यात्मिक ज्ञान जरूरी

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                     धर्म क्या है यह समझे बिना उसकी आलोचना करना गलत है। मेरे विचार से धर्म की किसी ने … more →

Tags: Blogroll, hindi, writing, हिन्दी, Dashboard, Global Dashboard, anugoonj, Thought, sanskrati

पुस्तकों का संग्रह, ज्ञान का प्रमाण नहीं

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                         जब सामान्य आदमी के मन में हलचल होती है वह उसे शांत करने के लिए किसी ज्ञानी … more →

Tags: अनुगूँज, अभिव्यक्ति, आचरण, आध्यात्म, आस्था, इंडिया, कविता, चरित्र, ताल-बेताल

आकाश में धरती:फिर स्वर्ग और नरक कहॉ है?

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                            वैज्ञानिकों ने आसमान एक धरती का अस्तित्त्व खोज निकाला है, उनके दावों पर … more →

Tags: anugoonj, apne lamhe, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आस्था, क्षनिअका, दृष्टिकोण, धर्म, प्रतिबिंब

अपने अन्दर है आध्यात्म शक्ति का केंद्र

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                             अक्सर लोग यह कहते हैं कि हमें धर्म की जरूरत क्यों है? हम अपना काम अच्छी … more →

Tags: अनुगूँज, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आस्था, दीपक द्वारा, दृष्टिकोण, धर्म, विचार, संपादकीय


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