रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जाना के ख़िलाफ़ और अगर होश की पूछो तो मुझे होश नहीं अब तो तासीर-ए-ग़म-ए-इश्क़ यहां तक पहुंची के इधर होश अगर… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जान … more →