अब के बरस भी वो नही आया बहार में, गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में, ये आग इश्क की है बुझाने से क्या बुझे, दिल तेरे बस में है न मेरे इख्तियार में, है टूटे दिल में तेरी मोहब्बत तेरा ख़याल, खुश-रंग है बहार ज… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: अब के बरस भी वो नही आया बहार में, गुज़रेगा और एक बरस इंतज़ार में, ये आग इश्क की है बुझाने से क्या बुझ … more →