बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इतने झुके कि कायरी का भरम देने लगे उस सर को, इज्ज़त से उठाने की ये कोशिश है बरसों बंधा पड़ा था कई अँधे… more →
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी: Awakening of Crushed AmbitionsRahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 8 months ago: This is movie for American students who wants to know more about the students of their age from diff … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: वह किसी मकान के लिये बन रही नींव के लिये गड्ढा खोद रहा था। उसके पास ही थोड़ी दूर स्थित मैदान में गरी … more →