बूरा जब वक़्त आता है, सहारे छूट जाते हैं। जो हमदम बनते थे हरदम, वो सारे छूट जातेहै। बड़ा दावा करें हम तैरने का जो समंदर से, फ़सेँ जब हम भँवर में तो, किनारे छूट जाते है। जो चंदा को ग्रहण लग जाये, सूरज सा… more →
रज़िया "राज़"दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रहिमन चाक कुम्हार को, मांगे दिया ना देह छेद में डंडा डारि कै, चहै नांद लै लेइ कविवर रहीम कह्ते ह … more →
harihar pokharel wrote 6 months ago: ६ भदौ २०६५ १) लोकतान्त्रीकरणका लागि जनयुद्ध, जनआन्दोलन र मधेस आन्दोलनमा वीरगति प्राप्त गर्ने सम्पू … more →
harihar pokharel wrote 6 months ago: काठमाडौँ, मङ्सिर ३० गते । नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी -एमाले) आठौँ महाधिवेशनको … more →
harihar pokharel wrote 6 months ago: वीरेन्द्रका लुगाफाटा लिलाममा काठमाडौँ, मङ्सिर ३० गते । तत्कालीन … more →
harihar pokharel wrote 6 months ago: प्रचण्ड विलय बाबुराम, फ्युजन किरण अर्जुन ज्ञवाली डिल्लीरमण रेग्मी, सूर्यप्रसाद उपाध्याय, सुवर्णशमश … more →
Ajad Panchhi wrote 6 months ago: PARIS, France (CNN) — Police evacuated a major department store in central Paris Tuesday after … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: बरसों पहले कृश्न चंदर का उपन्यास देख ‘एक गधे की आत्मकथा’। पूरा नहीं पढ़ा क्योंकि उसमें गधे का बोलना- … more →
उन्मुक्त wrote 7 months ago: स्पा (spa), एक ऐसी जगह, जहां आप स्वास्थ्य या तंदुरुस्ती बनाने के लिये जाते हैं। अधिकतर अच्छे होटलों … more →
sandeepkmishra wrote 7 months ago: ठंडे लोग हैं…ये नेताओं का गरमाना देखिए.. गुजर गए …जो कल आज थे… उनके इतिहास पर … more →
ummeed wrote 7 months ago: <!– /* Font Definitions */ @font-face {font-family:”Cambria Math”; panose-1 … more →
sanjayrajasthani wrote 7 months ago: राजस्थान में चुनाव अब रोचक दौर में पहुंचने लगा है। और तस्वीर हल्की -धुंधली बनने लगी है। हालांकि इस त … more →
ummeed wrote 7 months ago: वह कहते हैं परिवर्तन आएगा, हाँ,शायद परिवर्तन आएगा, टूटी कड़ियों को फिर से जोड़ा जाएगा, उन्हें उम्मीद ह … more →
set09 wrote 7 months ago: hi I am set from rajkot. i join wordpress for first time & this is my first comment. … more →
Amrita Bharti wrote 7 months ago: बिटिया एक दिन बापू ने स्नेह करते करते कहा, बेटियाँ पराया धन होती है, … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: एक तलाश पूरी होते ही आदमी दूसरी में जुट जाता अंतहीन सिलसिला है अपने मकसद रोज नये बनाता पूरे होते ही … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: पता नहीं कब कैसे इस देश में यह परंपरा शुरू हुई कि बाहर से जब तक आदमी प्रमाण पत्र नहीं मिले उसे घर मे … more →
nakkarkhana wrote 7 months ago: आँख में स्वपन कब था किसी रात का दर्द दिल में … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: डाइन भी सात घर छोड़कर कहर बरपाती अपने पडौस से निभाओ यह तो वह भी सिखाती उसकी राह पर चलने वाले असली … more →
Sarvesh K Tiwari wrote 8 months ago: duritaikaparam tuluShkanAtham drutamutkhAya jagat-trayaika-shalyam| pratiropaya rAmasetu madhye vija … more →