अक्सर लोग आपसी वार्तालाप में एक दूसरे के लिये उपहास या घृणावश कौआ, गधा, बगुला या मुर्गा जैसे शब्दों का प्रयोग करते… more →
दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिकाwrote 1 year ago: अक्सर लोग आपसी … more →
wrote 3 years ago: > भारत के महान संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं- ——————— … more →
wrote 4 years ago: कबीर गर्व न कीजिए, ऊंचा देखि आवास काल परौं भूईं लेटना, ऊपर जमसी घास संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →
wrote 4 years ago: १.जो मित्रों से सत्कार और सहायता पाकर कृतार्थ होकर भी उनका साथ नहीं निभाते ऐसे कृत्घ्नों के मरने पर … more →
wrote 4 years ago: >कबीर गर्व न कीजिए, ऊंचा देखि आवास काल परौं भूईं लेटना, ऊपर जमसी घास संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
wrote 4 years ago: अपने हाथ से अपने ही सिर पर पहन लेते हैं कोई भी ताज किससे लिया और कैसे सवालों के जवाब में रखते राज मे … more →
wrote 4 years ago: कहते को कहिं जान दे, गुरू की सीख तू लेय साकट जन और स्वान को, फेरि जवाब न देय कविवर रहीम कहते है कि क … more →
wrote 4 years ago: हिंसाशून्यमयत्नलभ्यमश्यनं धात्रा मरुत्कल्पितं व्यालानां पशवस्तृणांकुरभुजस्तुष्टाः स्थलीशायिनः संसारा … more →
wrote 4 years ago: नूनं हि ते कविवरा विपरीत वाचो ये नित्यमाहुरबला इति कामिनीनाम् । याभिर्विलालतर तारकदृष्टिपातैः शक्राय … more →
wrote 4 years ago: १.पाँव धोने का जल और संध्या के उपरांत शेष जल विकारों से युक्त हो जाता अत: उसे उपयोग में लाना अत्यंत … more →
wrote 4 years ago: श्रृङगारद्रुमनीरदे प्रचुरतः क्रीडारसस्त्रोतसि प्रद्युम्नप्रियन्धवे चतुरवाङ्मुक्ताफलोदन्वति। तन्वीनेत … more →
wrote 4 years ago: पावस देखि रहीम मन, कोइन साधे मौन अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछत कोय कविवर रहीम कहते है कि वर्षा ऋतु आत … more →
wrote 4 years ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। अपनी असफलता और दूसरे की सफलता से मनुष्य ईर्ष्यालु हो जाता। ईर्ष्या … more →
wrote 4 years ago: काटा कूटी जो करै, ते पाखंड को भेष निश्चय राम न जानहीं, कहैं कबीर संदेस संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
wrote 4 years ago: वरं पर्वतदुर्गेषु भ्रान्तं वनचरैः सह न मूर्खजनसम्पर्कः सुरेन्द्रभवनेष्वपि हिंदी में अर्थ- बियावान जं … more →
wrote 4 years ago: परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम् हिंदी में भावार्थ-परिवर्त … more →
wrote 4 years ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिये से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
wrote 4 years ago: तरुवर जड़ से काटिया, जबै तम्हारो जहाज तारे पर बोरे नहीं, बांह गाहे की लाज संत कबीर दास जी कहते हैं क … more →
wrote 4 years ago: कुंजी मुख से कन गिरा, खुटै न वाको आहार कौड़ी कन लेकर चली, पोषन दे परिवार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →