Blogs about: Adhyaatm

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चाणक्य नीति-आदमी चाहे तो गधे, सिंह,कौवे, बगुले और मुर्गे से भी सीख सकता है1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:                अक्सर लोग आपसी … more →

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>संत कबीर दर्शन-बाहर का दरवाजा बंद कर, अन्दर का खोलो (andar ka darvaja kholo-kabir darshan)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: > भारत के महान संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं- ——————— … more →

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कबीर वाणी:अपना ऊंचा आवास देख कर घमंड न करें

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: कबीर गर्व न कीजिए, ऊंचा देखि आवास काल परौं भूईं लेटना, ऊपर जमसी घास संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →

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विदुर नीति:मित्र निर्धन हो तो भी उसका सम्मान करें3 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: १.जो मित्रों से सत्कार और सहायता पाकर कृतार्थ होकर भी उनका साथ नहीं निभाते ऐसे कृत्घ्नों के मरने पर … more →

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>संत कबीर वाणी:अपने महल पर गर्व करना व्यर्थ2 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: >कबीर गर्व न कीजिए, ऊंचा देखि आवास काल परौं भूईं लेटना, ऊपर जमसी घास संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

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सस्ते में बिकने से आता नहीं आदमी बाज-हिन्दी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: अपने हाथ से अपने ही सिर पर पहन लेते हैं कोई भी ताज किससे लिया और कैसे सवालों के जवाब में रखते राज मे … more →

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रहीम के दोहःगुरु से शिक्षा लेकर अपनी राह चलें

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: कहते को कहिं जान दे, गुरू की सीख तू लेय साकट जन और स्वान को, फेरि जवाब न देय कविवर रहीम कहते है कि क … more →

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भृतहरि शतकःआजीविका कमाते हुए मनुष्य की जिंदगी चली जाती है

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: हिंसाशून्यमयत्नलभ्यमश्यनं धात्रा मरुत्कल्पितं व्यालानां पशवस्तृणांकुरभुजस्तुष्टाः स्थलीशायिनः संसारा … more →

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भृतहरि शतक:स्त्री को अबला मानने वाले कवि विपरीत बुद्धि के

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: नूनं हि ते कविवरा विपरीत वाचो ये नित्यमाहुरबला इति कामिनीनाम् । याभिर्विलालतर तारकदृष्टिपातैः शक्राय … more →

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चाणक्य नीति:बिना पूछे दान देना अधर्म का कार्य

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: १.पाँव धोने का जल और संध्या के उपरांत शेष जल विकारों से युक्त हो जाता अत: उसे उपयोग में लाना अत्यंत … more →

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भृतहरि शतकःकामदेव का शिकार हुए बिना युवावस्था निकल जाये तो धन्य समझें

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: श्रृङगारद्रुमनीरदे प्रचुरतः क्रीडारसस्त्रोतसि प्रद्युम्नप्रियन्धवे चतुरवाङ्मुक्ताफलोदन्वति। तन्वीनेत … more →

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रहीम के दोहे:मेंढक आवाज देते हों तो कोयल हो जाती है खामोश

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: पावस देखि रहीम मन, कोइन साधे मौन अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछत कोय कविवर रहीम कहते है कि वर्षा ऋतु आत … more →

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चाणक्य नीति:निम्न कोटि के व्यक्ति से भी सीखना पडे तो संकोच न करें

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। अपनी असफलता और दूसरे की सफलता से मनुष्य ईर्ष्यालु हो जाता। ईर्ष्या … more →

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संत कबीर वाणी:मांस खाने वाले राम को नहीं जानते

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: काटा कूटी जो करै, ते पाखंड को भेष निश्चय राम न जानहीं, कहैं कबीर संदेस संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

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भृतहरि शतक:मूर्ख के साथ इन्द्र की सभा में बैठना भी ठीक नहीं1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: वरं पर्वतदुर्गेषु भ्रान्तं वनचरैः सह न मूर्खजनसम्पर्कः सुरेन्द्रभवनेष्वपि हिंदी में अर्थ- बियावान जं … more →

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भृतहरि शतकःसंसार में आ रहे परिवर्तन से विचलित न हों

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम् हिंदी में भावार्थ-परिवर्त … more →

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संत कबीर वाणी:प्रेम अपने समान व्यक्ति से करना चाहिए

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिये से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

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संत कबीर वाणी:काटने पर भी लकडी जहाज बनकर पार लगाती है

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: तरुवर जड़ से काटिया, जबै तम्हारो जहाज तारे पर बोरे नहीं, बांह गाहे की लाज संत कबीर दास जी कहते हैं क … more →

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संत कबीर वाणी:हाथी के मुहँ से गिरे दाने से चींटी पेट पालती है

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: कुंजी मुख से कन गिरा, खुटै न वाको आहार कौड़ी कन लेकर चली, पोषन दे परिवार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

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