बाहर क्या दिखराइये, अन्तर जानिए राम कहा काज संसार से, तुझे घनी से काम संत शिरोमणि कबीरदास कहते हैं कि बाहर दिखाकर भगवान् का स्मरण करने से क्या लाभ, राम का स्मरण तो अपने ह्रदय में करना चाहिए। जब भगवान… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अपने हाथ से अपने ही सिर पर पहन लेते हैं कोई भी ताज किससे लिया और कैसे सवालों के जवाब में रखते राज म … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: कहते को कहिं जान दे, गुरू की सीख तू लेय साकट जन और स्वान को, फेरि जवाब न देय कविवर रहीम कहते है कि क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंसाशून्यमयत्नलभ्यमश्यनं धात्रा मरुत्कल्पितं व्यालानां पशवस्तृणांकुरभुजस्तुष्टाः स्थलीशायिनः संसार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नूनं हि ते कविवरा विपरीत वाचो ये नित्यमाहुरबला इति कामिनीनाम् । याभिर्विलालतर तारकदृष्टिपातैः शक्रा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.पाँव धोने का जल और संध्या के उपरांत शेष जल विकारों से युक्त हो जाता अत: उसे उपयोग में लाना अत्यंत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: श्रृङगारद्रुमनीरदे प्रचुरतः क्रीडारसस्त्रोतसि प्रद्युम्नप्रियन्धवे चतुरवाङ्मुक्ताफलोदन्वति। तन्वीने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पावस देखि रहीम मन, कोइन साधे मौन अब दादुर वक्ता भए, हमको पूछत कोय कविवर रहीम कहते है कि वर्षा ऋतु आत … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। अपनी असफलता और दूसरे की सफलता से मनुष्य ईर्ष्यालु हो जाता। ईर्ष्या … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: काटा कूटी जो करै, ते पाखंड को भेष निश्चय राम न जानहीं, कहैं कबीर संदेस संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वरं पर्वतदुर्गेषु भ्रान्तं वनचरैः सह न मूर्खजनसम्पर्कः सुरेन्द्रभवनेष्वपि हिंदी में अर्थ- बियावान जं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: परिवर्तिनि संसारे मृतः को वा न जायते स जातो येन जातेन याति वंशः समुन्नतिम् हिंदी में भावार्थ-परिवर् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिये से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तरुवर जड़ से काटिया, जबै तम्हारो जहाज तारे पर बोरे नहीं, बांह गाहे की लाज संत कबीर दास जी कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कुंजी मुख से कन गिरा, खुटै न वाको आहार कौड़ी कन लेकर चली, पोषन दे परिवार संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वह ज्ञानी थे और अभी प्रवचन कार्यक्रम कर लौटे थे। मेरे से उनकी मुलाकात उनके यजमान के घर पर जो कि मेर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.जिन व्यक्तियों के पास विद्या, दान, शील तप के गुण नहीं हैं वह व्यक्ति इस पृथ्वी पर बोझ है और वह पशु … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: inglish transleteshan by googl tool 1.Rahim says that big man who is suffering more days, it can no … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.क्रोध यमराज के समान है, उसके कारण मनुष्य मृत्यु की गोद में चला जाता है। तृष्णा वैतरणी नदी की तरह ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.चलती हुई बैलगाडी से पांच हाथ, घोडे से दस हाथ और हाथी से सौ हाथ दूर रहें. 2. यदि आप सफलता हासिल करन … more →