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विदुर नीति-अर्थ प्राप्ति के लिए धर्म का पालन करें (arth aur dharm-hindu adhyamik sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: यस्यात्मा विरतः पापाद कल्याणे च निवेशितः। तेन स्र्वमिदं बुद्धम् प्रकृतिर्विकृतिश्चय वा।। हिंदी में भ … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, कविता, धर्म, मस्त राम, मस्तराम

भर्तृहरि नीति शतक-भक्ति को धंधे की तरह न करें (bhakti ko dhandha n samjhen-hindu sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 3 days ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————————— क … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, आलेख, आस्था, दीपक भारतदीप, धर्म, हिंदी पत्रिका, हिन्दू, bharat

लायकी से अधिक मिले तो घमंड आ ही जाता है-विदुर नीति-(yogyata aur ghamand-hindu sandesh)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: कौटिल्य महाराज के अनुसार —————————- उच्चेरुच्च … more →

Tags: अध्यात्म, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Dashboard, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

भर्तृहरि नीति शतक-क्षमा करती है कवच की तरह काम

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: क्षान्तिश्चत्कवचेन किं किमनिरभिः क्रोधीऽस्ति चेद्दिहिनां ज्ञातिश्चयेदनलेन किं यदि सहृदद्दिव्यौषधं कि … more →

Tags: Hindi writing, Hindu darshan, Hindu culture, hindi india, hindu dharm, web duniya, hindi abhivyakti, hindi vyangy, hindi media

आज श्री गुरुनानक जी की जयंती है-हिंदी लेख (shri guru nanak jayanti prakash and parva-hindi article

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आज श्री गुरुनानक देव जी का 541वां प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। सच तो यह है कि समाज को अमृत संदेश देन … more →

Tags: हिन्दी, गुरुनानक जयंती, धर्म, प्रकाशपर्व, सिख, हिन्दू, Guru Nanak Dev, gurugranth

कौटिल्य दर्शन-दोस्त और दुश्मन दो प्रकार के होते हैं (kautilya darshan-dost aur dushman)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प … more →

Tags: abhivyakti, alekh, arebic, Article, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप

संत कबीरदास-धर्म का आशय कौन जानता है (dharm ka ashaya-kabirdas ji

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कहै हिन्दु मोहि राम पिआरा, तुरक कहे रहिमाना। आपस में दोऊ लरि-लरि मुए, मरम न कोऊ जाना।।संत शिरोमणि कब … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, कला

संत कबीरदास के दोहे-अपनी तारीफ और दूसरे की बुराई न करें (kabir ke dohe-apne tarif aur doosre ke burai na karen)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging, Hindi Education

रहीमदास के दोहे-अपने मन की बात दूसरे को न बताएं (apne man ki bat-rahim das ke dohe)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन निज मन की, बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि अठिलैह लोग सब, बाटि न लैहैं न कोय।। कविवर रहीम कहते हैं … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, जागरण, धर्म, संदेश, समाज

चाणक्य नीति-पवित्र काम मन लगाकर पूरा करें (pavitra kaam-chankya niti in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ————————- धनहीनो न ही … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आदमी, आध्यात्म, चाणक्य, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, शिक्षक, हिन्दी

हिंदी अध्यात्म सन्देश-बुरे काम से दूर होकर ही अच्छाई समझना संभव (hindu adhyatm sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्। न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।। हिंदी में भावार् … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज, हिन्दी

संत कबीर के दोहे-कष्ट और कलह की जड़ है गाली देना (gali dena galat-kabir ke dohe

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कबीर, कला, मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी

मनुस्मृति-दूसरों के माल पर नजर न डालें (paraya mal apna na samjhen)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————— यानाश्य्यासनान्यस्य, कूपोद्यान ग्र … more →

Tags: hindi Personal, Hindi knowledge, Hindi Darshan, hindi adhyatm, hindi abhivyakti, hindi megzine, hindi shabd, hindi internet, Hindi Blogging

संत कबीर के दोहे-बिना अनुभव के ज्ञान देना अनुचित

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कूकट कूटै कन बिना, बिन करनी का ज्ञान। ज्यौं बन्दूक गोली बिना, भड़क न मरि आन।। संत शिरोमणि कबीरदास जी … more →

Tags: hindi Personal, Hindi knowledge, bharat, hindi abhivyakti, hindi megzine, Hindi Blogging, Global Dashboard, Deepak bharatdeep, Deepak bapu

कबीर के दोहे- दिखावटी भक्ति संकट में छूट जाती है (sankat aur bhakti-kabir ka dohe)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं ————————– देख … more →

Tags: दीपक भारतदीप, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Hindi writing, India, inglish, web bhaskar, web bharat, web dunia

विदुर नीति- दुष्ट की सलाह पर व्यक्ति चले तो उससे दूर रहें (vidur niti-raja aur dusht ki salah)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: न निह्यवं मन्त्र गचछेत संसृष्टमन्त्रस्य कुसंगतस्य। न च ब्रूयात्रश्वसिमि त्वयीति संकारणं व्यपदेशं तु … more →

Tags: Blogroll, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi bhasakar, deshboard, हिन्दी, आलेख, E-patrika, समाज

कौटिल्य का अर्थशास्त्र-किसी को अपनी योग्यता से अधिक महापद भी मिल जाता है (ablity and post-kautilya ka arthshastra)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कौटिल्य महाराज के अनुसार —————————- उच्चेरुच्च … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मातृभाषा, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, कला, समाज

मनु स्मृति-हृदय में यम साक्षी रूप में स्थित रहते हैं (jhooth mat bolo-manu smriti)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यमो वैवस्वतो देवो यस्तवैध हृदिस्थितः। तेन चेदविवादस्ते मां गंगा मा कृरून गमः।। हिंदी में भावार्थ-सभी … more →

Tags: हिंदी, आलेख, आध्यात्म, हिंदी पत्रिका, भगवान, कला, सूचना, अध्यात्म, hindu

कबीर के दोहे-अपनी सराहना स्वयं न करें (kabir darshan-dosron ke dosh)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आपन को न सराहिये, पर निन्दिये न नहिं कोय। चढ़ना लम्बा धौहरा, ना जानै क्या होय।। संत शिरोमणि कबीरदास ज … more →

Tags: arebic, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, हिन्दी, Deepak bharatdeep


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