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Blogs about: Aducation

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विभिन्न समाजों का पुराने ढर्रे पर चलना अब कठिन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, सूचना, अनुभूति, आलेख

जब लोग अपने दिल की बात लिख देते हैं-आलेख 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल  मीनाक्षी ने मुझे हतप्रभ कर दिया क्योंकि अपने ब्लाग (शब्द पत्रिका) पर मैंने जो लेख रखा था उस पर म … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, साहित्य

मै अखबार आज भी क्यों पढ़ता हूं-हास्य व्यंग्य2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:           मैने अखबार पढ़ना बचपन से ही शुरू किया क्योंकि मोहल्ले का वाचनालय हमारे किराये के घर के पास … more →

Tags: writing, vyangya, अनुगूँज, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India

सत्य से पीछा छुड़ाकर कहां जायें-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लाया फंदेबाज कई तस्वीरें और दिखाते हुए बोला ‘‘दीपक बापू, तुम ही एक दोस्त हो जिससे हम कुछ कह पाते हैं … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, inglish, कविता, व्यंग्य चिंतन, शायरी, भारत, चरित्र

संत कबीर वाणी:सेवा के बदले दाम मांगे वह सेवक नहीं 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: फल कारण सेवा करे, करे न मन से काम कहैं कबीर सेवक नहीं, कहैं चौगुना दाम संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

Tags: Blogroll, धर्म, संस्कार, आध्यात्म, भारत, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, arebic

संत कबीर वाणी:पढ़ कर पत्थर और लिख कर ईंट होते लोग

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चतुराई क्या कीजिए, जो नहिं शब्द समाय कोटिक गुन सूवा पढै, अन्त बिलाई खाय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

Tags: aastha, arebic, आध्यात्म, आस्था, कबीर, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भाषा, शिक्षा

ऐसा कोई सयाना नहीं रहा 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कोई हमारे दर्द को आकर सहलाये इस चाह में इन्तजार करने का ज़माना अब नहीं रहा किसी के दर्द को सहलाकर हम … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, अनुगूँज, कविता, यकीन, चरित्र, Shayri, Sher

शक्तिशाली लोग हर जगह समाज की फिक्र करें 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मलेशिया में भारतवंशियों के आन्दोलन पर वहाँ की सरकार का बराबर रवैया अत्यंत चिंता का विषय है और हर समय … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिन्दी, Dashboard, Kavita, Thought, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति

मनु स्मृति: राज्य के दण्ड से ही अनुशासन संभव

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1.देश, काल, विद्या एवं अन्यास में लिप्त अपराधियों की शक्ति को देखते हुए राज्य को उन्हें उचित दण्ड दे … more →

Tags: Blogroll, हिन्दी, Thought, aastha, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, चिन्तन, सूचना, अनुभूति

ब्लोग लेखक और लेखक ब्लोगर

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: ब्लोगरों के वर्गीकरण को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. इसका वैसे कोई आधिकारिक वर्गीकरण नहीं हुआ है, प … more →

Tags: writing, धर्म, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, विश्वास, बिंब-प्रतिबिंब, अनुभूति, आलेख

रहीम के दोहे:कपटी की संगत से भारी शारीरिक हानि

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: रहिमन लाख भली करो, अगुनी अगुन न जाय राग सुनत पय पियत हू, सांप सहज धरि खाय कविवर रहीम कहते हैं की असं … more →

Tags: writing, हिन्दी, धर्म, संस्कार, आध्यात्म, vishvaas, सूचना, आलेख, साहित्य

जंग में पिसता है आम आदमी

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: एक कहे  आजादी की  जंग दूसरा दे उसे आतंक का रंग आम आदमी ही होता है तंग नहीं होता वह पूर्व और पश्चिम क … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, Kavita, व्यंग्य चिंतन, चिन्तन, Shayri, शेर, हिंदी साहित्य

रहीम के दोहे:बुरे वक्त में राम का नाम ही सहायक1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जो रहीम करिबो हुतो, ब्रज को इहै हवाल तौ काहे  कर धरुयो, गोवर्धन गोपाल कविवर रहीम कहते हैं कि श्रीकृष … more →

Tags: Blogroll, हिन्दी, Dashboard, aastha, विचार, India, विश्वास, सूचना, साहित्य

रहीम के दोहे: बिपति भए धन न रहे

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बिपति भए धन न रहे, रहे जो लाख करोड़ नभ तारे छिपि जात है, ज्यों रहीम भए भोर कवि रहीम कहते हैं, जैसे प … more →

Tags: Blogroll, हिन्दी, anugoonj, aastha, vividha, चिन्तन, bhaarat, आलेख, साहित्य

जब फूलों को देखने के लिए पैसे देने होंगे

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अगर एक अखबार की खबर पर यकीन करें तो आगे चलकर प्रकृति को निहारने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे. इस मामले … more →

Tags: Blogroll, writing, Dashboard, aastha, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, बिंब-प्रतिबिंब, हास्य व्यंग्य

धोनी कप्तान की तरह पेश आये

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: एक दिवसीय मैचों के श्रंखला में आस्ट्रेलिया ने भारत को अभी मैचों में हराकर यह सिद्ध कर दिया है कि अभी … more →

Tags: Blogroll, Cricket, bhaarat, arebic, bharat, hindi, हिन्दी, साहित्य, विचार

धोनी कप्तान की तरह पेश आयें

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: एक दिवसीय मैचों के श्रंखला में आस्ट्रेलिया ने भारत को अभी दो मैचों में हराकर यह सिद्ध कर दिया है कि … more →

Tags: Blogroll, hindi, writing, हिन्दी, Dashboard, दीपक द्वारा, India, bhaarat, बिंब-प्रतिबिंब

चाणक्य नीति:भावना से प्रतिमा में भी भगवान्

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: 1.मन की शुद्ध भावना से यदि लकड़ी, पत्थर या किसी धातु से बनी मूर्ति की पूजा की जायेगी तो सब में व्याप् … more →

Tags: Blogroll, hindi, Dashboard, aastha, inglish, bhaarat, knowledge, arebic, edcation

संत कबीर वाणी: साधू वह जो समदर्शी हो

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते … more →

Tags: Blogroll, हिन्दी, Dashboard, anugoonj, dharam, आध्यात्म, चिन्तन, apne lamhe, हिंदी साहित्य


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