खुदा-ए-अज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी न वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआओं की फेहरिस्त लंबी होगी | … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: खुदा-ए-अज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी न वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआ … more →