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Blogs about: Alekh

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कौटिल्य दर्शन-दोस्त और दुश्मन दो प्रकार के होते हैं (kautilya darshan-dost aur dushman)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: सहज कार्यजश्वव द्विविधः शत्रु सच्यते। सहज स्वकुलोत्पन्न कार्यजः स्मृतः। हिंदी में भावार्थ-शत्रु दो प … more →

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श्री गीता से-वेद ज्ञान से बड़ी है ह्रदय से की गए भक्ति (ved aur bhakt-shri geeta in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः। वेदावादरताः पार्थ नान्यदरस्तीति वादिनः।। कामात्मानः स्वर … more →

Tags: हिन्दी, संपादकीय, अभिव्यक्ति, hindi, adhyatm, dharm, hindu, bharat, India

चाणक्य नीति-प्रतिकार प्रतिहिंसा और प्रतिकार के भाव में दोष नहीं (chankya niti-time to time, life style)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे। सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।। हिन्दी में भावार्थ-नीति … more →

Tags: Anubhuti, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, सन्देश, समाज

कौटिल्य का अर्थशास्त्र-कार्य के होते हैं तीन व्यसन (kautilya ka arthshastra in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: वस्तुध्वशक्येषु समुद्यनश्चेच्छक्येषु मोहादसमुद्यश्मश्च। शक्येषु कालेन समुद्यनश्व त्रिघैव कार्यव्यसनं … more →

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रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →

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स्त्रियों की कम संख्या उनके प्रति बढ़ते अपराधों के लिये जिम्मेदार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो गयी … more →

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संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →

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श्री गुरुवाणी-सत्संग से विचार निर्मल होते हैं

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: ‘जो जो कथै सुनै हरि कीरतन ता की दुरमति नासु।’ सगन मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आसु।।’’ हिंदी में भावार् … more →

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भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————– कृमिकुलचितं लालाक्लिन् … more →

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मशहूर होने का बोझ सभी नहीं उठा सकते-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हिंदी ब्लाग जगत पर अनेक लोग छद्म नाम से लिखते हैं और यह परंपरा उन्होंने अंग्रेजी से ही ली है। जहां त … more →

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अंतर्जाल पर हिंदी का नया वैश्विक काल प्रारंभ -संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लिय … more →

Tags: हिन्दी, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Life, Internet, Bloging, Education, Blogging

दिवस बनाता कोई और है, मनाता कोई और है-व्यंग्य hasya vyangya

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: दिवस बनाता कोई और है और मनाता कोई और है। इस देश में हर रोज कोई न कोई दिवस मनाने की चर्चा होती है। अभ … more →

Tags: दीपक भारतदीप, समाज, हिंदी, हिंदी आलेख, हिन्दी, Deepak bharatdeep, hasya kavita, hasya -vyangya, Hindi writing

अंतर्जाल पर अंग्रेजी से नहीं बल्कि हिन्दी से ही बदलाव हो सकता है=आलेख

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अंतर्जाल के ब्लाग पर सामाजिक आंदोलन और जागरुकता के लिये प्रयास कोई अब नयी बात नहीं है। कुछ लोगों ने … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, editoriyal, Internet, Anubhuti, अनुभूति

एक दिन क्या पूरा महीना है मज़े लेने का - व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: वैलंटाईन डे की चर्चा आजकल सुर्खियों में हैं। इसका कुछ लोग विरोध करते हैं तो कुछ नारी स्वतंत्रता के न … more →

Tags: inglish, हिन्दी, Dashboard, अभिव्यक्ति, ताल-बेताल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Education, Family

अध्यात्म ज्ञान के बिना धर्म को समझना कठिन-चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: धर्म क्या है यह समझे बिना उसकी आलोचना करना गलत है। किसी भी धार्मिक विद्वान् ने अपने विचार से धर्म की … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, jagran, abhivyakti, adhyatm, editoriyal

ब्लाग लिखने में शेयर बाजार जैसा ही मजा-व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लाग/पत्रिका लिखने का मजा तभी है जब उसके साथ पाठकों के आने की सूचना देने वाला काउंटर हो। अगर बहुत स … more →

Tags: Blogroll, inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, Education, Blogging, web duniya, web dunia, web jagaran

सुविधाओं के गुलाम-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ था या एक राष्ट्र के रूप में स्थापना हुई थी। परंतत्र देश स्वतंत्र हुआ … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, साहित्य, हिन्दी, Deepak bharatdeep

संत कबीर वाणीः किसी काम के नहीं हों तो ऊंचे आदमी होने से क्या लाभ1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जोरे बड़ मति नांहि जैसे फूल उजाड़ को, मिथ्या हो झड़ जांहि संत शिरोमणि कबीरदास … more →

Tags: Hindi writing, web duniya, hindi megzine, web dunia, web jagaran, web bhasakar, web nai duniya, Deepak bharatdeep, हिंदी पत्रिका

चाणक्य नीतिः कौन ऐसा व्यक्ति है जिसके कुल में दोष नहीं है1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.आज के युग में अर्थ की प्रधानता है और धन संचय प्रमुख आधार है। धन संचय हर मनुष्य के लिये आवश्यक है क … more →

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