एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम हर लम्हा तेरा नाम जपता हूँ सनम हाल मेरा बद से बद्तर हो गया है ज़िंदगी का हर पल बेज़ार हो गया है एक मेरा सपना … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: एक मेरा सपना तू ही तो थी जाना दूर जो गयी तू हो गया वह बेग़ाना इंतिज़ार तेरा करता हूँ तेरी क़सम हर लम्ह … more →