“मंजिलें भी उसकी थीं, रास्ते भी उसके थे , मैं तनहा था , काफिले भी उसके थे , साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी, फिर रास्ते बदलने का फ़ैसला भी उसका था, आज क्यूँ तनहा है ये … more →
Gaurav's Notesविनय wrote 11 months ago: कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी वरना तुम यहाँ न आती वरना यादें तेरी न होती यूँ बरस गुज़रते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →
विनय wrote 1 year ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई कि … more →
विनय wrote 1 year ago: मोती दो’ साथ पिरोना और लड़ना और बिगड़ना और बात अलग है तन्हा जीना तन्हाई से बातें करना और आधी-आ … more →
विनय wrote 1 year ago: क्या वह तुम थे जो आँखों को महका गये तमन्ना दबी-सी मेरे दिल में सुलगा गये मैं कितना तन्हा फिर रहा था … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी जो ख़ाहिश करता हूँ क्या कोई गुनाह करता हूँ चाहे जो भी समझ ले तू मैं तुझसे प्यार करता हूँ यह उम् … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं उससे मोहब्बत करता था आज भी करता हूँ काँच के दिल में जान भरता हूँ मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में … more →
विनय wrote 1 year ago: एक ही रास्ता जब है दोनों का फिर क्यों दोनों तन्हा फिर क्यों दोनों तन्हा मेरा मरहम है तू मेरा मज़हब है … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी हम मौसम थे कभी ख़ुद मौसम था सावन की चाह में इक सावन मिला तो दूसरा गया आजकल अकेला हूँ शायिर: विनय … more →
विनय wrote 1 year ago: तू कर यह वादा भी मेरे अल्लाह तू संग न होगा तू है भी अगर किसी बुते-संग में तू संग न होगा तेरी मर्ज़ी स … more →
विनय wrote 1 year ago: नज़र बचते बचाते लड़ ही गयी मय उन आँखों की हमें चढ़ ही गयी पूछो ज़रा गुलपोश से वह कहाँ है आज … more →
विनय wrote 1 year ago: रोज़े – शामे – दीवाली कोई नूरे – चराग़ नहीं चौखट सूनी दिल वीराँ तन्हा - … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको नफ़रत है मुझसे मुझको क़रार है तुमसे तन्हा मिलो मुझसे कभी’ कहूँ प्यार है तुमसे तुम चलते हो … more →
विनय wrote 2 years ago: जिससे दुनिया ने हर चीज़ छीनी जिसे अपनी चाहत न मिली जिसके दरवाज़े पर खु़शी आकर लौट गयी जिसकी आँखों से न … more →
विनय wrote 2 years ago: एक गिरह ज़ुबाँ में, सब के होती है वक़्त लगते ही लफ़्ज़ अटका देती है लोग क्या समझते हैं मैं ना-पाक हूँ या … more →
विनय wrote 2 years ago: वो क्यों देखती है मुझे? उसे क्या चाहिए मुझसे? न रब्त कोई रखा मैंने उससे न ही उसने मुझसे फिर क्यों दे … more →
विनय wrote 2 years ago: एक अधूरी ख़ाहिश लिए मैं भटक रहा हूँ दर-ब-दर, सुनसान ख़ाली सड़कों पर अँधेरा ही अँधेरा है, इन अँधेरों … more →
विनय wrote 2 years ago: लहर इक ‘विनय’ टकराया जो पत्थर से टूट गया जब भी निकला आगे उसके हाथों से एक हाथ छूट गया जब भी बैठता है … more →
Gaurav Mishra wrote 2 years ago: “मंजिलें भी उसकी थीं, रास्ते भी उसके थे , मैं तनहा था , काफिले भी उसके थे , साथ साथ … more →