नाटक या नाट्य में प्रयुक्त भाषा को नाट्यभाषा कहते हैं। भरत के अनुसार नाट्य या नाटक वह है जो लोकस्वभाव को अंगादि के अभिनय की सहायता से प्रदर्शित किया जाता है। अभिनवगुप्त के अनुसार नाट्य नटनीय नर्तन है।… more →
हिन्दी साहित्यShaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 weeks ago: कड़ी जोड़ने के लिए देखें : . प्रकृति और जीवन पद्धति जिस प्रकार लोग पृथ्वी पर फैलते गए उसी प्रकार पृथ् … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: पिछली बार हमने मानव की जैविक जरूरतों जैसे भोजन, आराम करना आदि के बारे में चर्चा की थी. अब हम इनपर एक … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: इससे पहले : संस्कृति की विभिन्नता और मानव का विकास – दूसरी किश्त संस्कृति की विभिन्नता और मानव का वि … more →
Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: ऑडियो और प्रथम किश्त के लिए यहाँ क्लिक करें : . भोजन पकाने की विधियों में भी नवजाति संस्कृति की विशे … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: नाटक या नाट्य में प्रयुक्त भाषा को नाट्यभाषा कहते हैं। भरत के अनुसार नाट्य या नाटक वह है जो लोकस्वभा … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: समीक्षा की उत्पत्ति के लिए मानुषी वृत्ति (अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा कहना) इसकी धरातल कही जा सकत … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: हिन्दी साहित्य का आधुनिक काल 1850 से आरम्भ होता है । हिंदी साहित्य के इस युग में भारतीय-राष्ट्रीयता … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 2 years ago: हिंदी साहित्य का आधुनिक काल तत्कालीन राजनैतिक गतिविधियों से प्रभावित हुआ। इसको हिंदी साहित्य का सर … more →