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Blogs about: Anubhuti

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प्रजातंत्र में ब्लॉग की महत्वपूर्ण भूमिका-हिंदी लेख (democracy and hindi blog-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →

Tags: writing, inglish, दीपक द्वारा, अभिव्यक्ति, अनुभूति, आलेख, साहित्य, Internet, सृजन

शिशुओं का क्रीड़ाश्रम और मिठाई-हिन्दीहास्य व्यंग (child story and sweats-hindi vyanga

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर प … more →

Tags: writing, हिन्दी, vyangya, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, India, हास्य व्यंग्य, अनुभूति

बुतों का बाजार-हास्य व्यंग्य कविता (buton ka bazar-hindi hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: चौराहे पर खड़े पत्थर के बुत पर कंकड़ लगने पर भी लोग भड़क जाते हैं। अगला निशाना खुद होंगे यह भय सताता है … more →

Tags: writing, अभिव्यक्ति, bhaarat, भारत, shayree, Shayri, अनुभूति, media, Internet

कबीर वाणी-प्यार को सही ढंग से कोई नहीं समझता(kabir vani-pyar ka gyan)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रेम-प्रेम सब कोइ कहैं, प्रेम न चीन्है कोय जा मारग साहिब मिलै, प्रेम कहावै सोय संत शिरोमणि कबीरदास … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, दोहे, धर्म, सन्देश, हिन्दी

चाणक्य नीति-प्रतिकार प्रतिहिंसा और प्रतिकार के भाव में दोष नहीं (chankya niti-time to time, life style)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: संसार विषवृक्षस्य द्वे फले अमृतोपमे। सुभाषितं च सुस्वादु संगतिः सुजने जनै।। हिन्दी में भावार्थ-नीति … more →

Tags: alekh, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, सन्देश, समाज

वैचारिक महाभारत की आवश्यकता-आलेख (baba shri ramdev,shri shri ravishankar & shri gita)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कभी समलैंगिकता तो कभी सच का सामना, युवक युवतियों के बिना विवाह साथ रहने और इंटरनेट पर यौन सामग्री से … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, संपादकीय, हिन्दी

कौटिल्य का अर्थशास्त्र-कार्य के होते हैं तीन व्यसन (kautilya ka arthshastra in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: वस्तुध्वशक्येषु समुद्यनश्चेच्छक्येषु मोहादसमुद्यश्मश्च। शक्येषु कालेन समुद्यनश्व त्रिघैव कार्यव्यसनं … more →

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श्री गीता से-दूसरे के रोजगार का नाश करना तामस प्रकृत्ति का परिचायक (shri gita sandesh in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अयुक्तः प्राकृतः स्तब्धः शठो नैष्कृतिकोऽलसः। विषादी दीर्घसूत्रीच कर्ता तामस उच्यते।। हिंदी में भावार … more →

Tags: आध्यात्म, आलेख, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, bhagavan shri krishn, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Global Dashboard, hindi abhivyakti

असमंजस-हिंदी लघुकथा (hindi lagu katha)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: पिता ने अपनी पूरी जिंदगी छोटी दुकान पर गुजारी और वह नहीं चाहते थे कि उनका पुत्र भी इसी तरह अपनी जिंद … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, शादी, सूचना, सृजन

रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →

Tags: adhyatm, alekh, चिंतन, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, मस्तराम, शब्द, हिन्दी

भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————– कृमिकुलचितं लालाक्लिन् … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, jagran, alekh, abhivyakti, adhyatm, Internet, India

व्यक्ति में चेतना लाने से ही समाज जागृत होगा-चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अक्सर यह सुनने को मिलता है कि ‘महाभारत घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे क्लेश होता है’। हो सकता ह … more →

Tags: writing, हिन्दी, संस्कार, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, आलेख

चोर........ चोर (हास्य व्यंग्य)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: उस गांव एक घर में चार चोर घुसे। उन्होंने बहुत सारा सामान अपने झोलों में भर लिया था कि अचानक घर एक सद … more →

Tags: writing, हिन्दी, vyangya, inglish, अभिव्यक्ति, yakeen, India, हास्य व्यंग्य, अनुभूति

बाज़ार में बिकती है दवा और अमृत-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →

Tags: चिंतन, Internet, सन्देश, शायरी, शब्द, साहित्य, दीपक भारतदीप, arebic, web dunia

अंतर्जाल पर अंग्रेजी से नहीं बल्कि हिन्दी से ही बदलाव हो सकता है=आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: अंतर्जाल के ब्लाग पर सामाजिक आंदोलन और जागरुकता के लिये प्रयास कोई अब नयी बात नहीं है। कुछ लोगों ने … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, alekh, editoriyal, Internet, अनुभूति

वैलंटाईन डे का एक दिन में शोर थमा (हास्य-व्यग्य)

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: कल वैलंटाईन डे बीत गया। पिछले प्रदंह दिन से उसका प्रचार जोरदार ढंग से हुआ। आज अनेक खबरें इस बारे में … more →

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मंदी का दौर:नया उपभोक्ता वर्ग कहां से आयेगा-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: अमेरिका के उद्योगपति बिल गेट्स ने कहा है कि वर्तमान मंदी अगले चार साल तक चल सकती है। बिल गेट्स विश्व … more →

Tags: हिन्दी, संपादकीय, अभिव्यक्ति, jagran, editoriyal, Internet, Friends, India, सन्देश

हिंदू विचारधारा:भारतीय और अफ़गानी-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: एक बात निश्चित है कि धर्म नितांत एक निजी विषय है और उस पर सार्वजनिक विषय पर चर्चा करना केवल एक दिखाव … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, संपादकीय, India, इंडिया, भारत, अनुभूति, आलेख

इसलिये तो गुरू हैं-लघु हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गुरुजी टूथपेस्ट कर रहे थे और खास चेला पास में खड़ा था। गुरुजी ने पूछा-‘बाहर की क्या खबर है?’ चेले ने … more →

Tags: writing, inglish, अभिव्यक्ति, सूचना, हास्य व्यंग्य, अनुभूति, आलेख, साहित्य, Internet


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