अमेरिका….. अमेरिका….. ओऽऽ अमेरिका ऽऽऽऽ जीतू भाई ने इस बार की अनुगूँज में हिस्सा लेते हुए पाँच बातें लिखी हैं कि यदि हिन्दुस्तान अमेरिका बन जाए तो कैसा होगा। कुछ बातें जो उजागर होती हैं: तो… more →
दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बिपति भए धन न रहे, रहे जो लाख करोड़ नभ तारे छिपि जात है, ज्यों रहीम भए भोर कवि रहीम कहते हैं, जैसे प … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जौन चाल संसार के जौ साधू को नाहिं डिंभ चाल करनी करे, साधू कहो मत ताहिं संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने ख्यालो में दुनियाँ भर की दौलत जुटाने घर-परिवार के लिये हर तरह की सुविधाएं बनाने का खूबसूरत स … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बडे-बुजुर्ग कह गये हैं की जितनी सुविधा लोगे उतनी ही जीवन में कठिनाई तुम्हारे सामने आयेगी। जैसे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: स्कूल में बच्चों को प्रोत्साहन देने के लिए ड्राइंग के शिक्षक ने चित्रकार प्रतियोगिता का आयोजन किय … more →
Amit wrote 2 years ago: अमेरिका….. अमेरिका….. ओऽऽ अमेरिका ऽऽऽऽ जीतू भाई ने इस बार की अनुगूँज में हिस्सा लेते हुए … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारिता का क्षेत्र समाज में आकर्षण का केंद्र होते हैं । … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आजकल जिसे देखो अपने लोगों-यानी अपने रिश्तेदारों , परिचितों, मित्रों और परिवार -पर यकीन नहीं करता । ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने शब्द भंडार से कैसी भी रचना करो समाज के वास्तविक भाव से परे झूठे भय दिखाकर कब तक प्रशंसा पाओगे अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह व्यंग्य रचना काल्पनिक तथा किसी व्यक्ति या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है ) देखो वही अपनी जिन्दगी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मुखों की बैठक में सिंहासन पर मुखोटा रखने का मसला उठा था सबके चेहरे थे दागदार चुनाव के जुए में लोगों … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह काल्पनिक व्यंग्य रचना है इसका किसी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है ) कहते हैं हमारे भैया ढा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाता है पर रात को जो भटका वह सुबह तक वापस नहीं आये तो घर में तूफ़ान मच … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: देवराज इंद्र द्वारा राजा हरिश्चन्द्र के पुत्र रोहित को उपदेश के रुप में संस्कृत में दिए गये श्लोक का … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और मेर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह कहानी काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है) बोस उस पर चिल्ला रहा था- … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मुखों की बैठक में सिंहासन पर मुखोटा रखने का मसला उठा था सबके चेहरे थे दागदार चुनाव के जुए में लोगों … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपनी इच्छाओं और आशाओं की सतत पूर्ती को ही मनुष्य वास्तविक सुख समझता है -उसे लगता है … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आज दीपकबापू…पर निष्काम और सहज भाव से लिखो, बदलाव आते रहेंगे लेख पर मुझे मेरे एक साथी ने ईमेल … more →