दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी ब्लाग जगत में नित नये अनुभव होते हैं। यह पता ही नहीं लगता कि कोई उसी बात पर नाराज हो रहा है जि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आज दीपकबापू कहिन ने १० हजार पाठकों का आंकडा पार कर लिया है. मेरे द्वारा बनाया जब यह ब्लोग बनाया गया … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: कभी ताज के लिये संदेश हवा में उड़ाकर सारी दुनिया में दिलाते सम्मान लोगों की बुद्धि को घुमाने क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएँ ————————- — … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: यह कविता काल्पनिक है तथा किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है। कल सांय प्रकाशित रचना कुछ न … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है तथा किसी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है- गलत टाईम सेटिं … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह रचना कल नारद पर प्रकाशित नहीं थी इसलिये यहाँ पुन: प्रकाशित की गयी है) वह प्रतिदिन हिट होने के न … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाता है पर रात को जो भटका वह सुबह तक वापस नहीं आये तो घर में तूफ़ान मच … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: लोग रचनाओं की चर्चा तो बहुत करते हैं पर उन पर आयी कमेंट भी कम महत्व की नहीं होती है-और कभी – क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने मुहँ से बढ़ाएं, अपनी बात का भाव दुसरे को दें नसीहत, अपने मन में दुर्भाव न वाणी में मिठास, न विच … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और मेर … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: लिखने से इन्कलाब या बदलाव नहीं आता पर बिना लिखे भी कौनसा आ जाता है। इन्कलाब लान … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: इस देश में लोकतंत्र है और अपनी मांगों के समर्थन में आन्दोलन करने का सभी लोगों को हक … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: लोगों के झुंड लेकर निकलते है वह रोज नारे बदल-बदलकर अपना नाम अखबार में छपवाते हैं शीर्षक बदलकर झुंड म … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: यह प्रश्न नहीं है कि किसी जात के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की माँग जायज है कि न … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दिन में झंडे और डंडे देकर लोगों को हाथ में देकर सड़कों पर जुलूस निकल्वाएंगे शाम को शांति की बात करने … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपनों से बढती दूरी का दर्द अब बहुत हो गया है इसीलिये गैरों में अपनेंपन की तलाश का प्रचलन हो गया है फ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: किसके मन में क्या है कौन जानेगा अपने मन को ही भला कौन जानता है पल-पल हालात के साथ बदलता मन कौन लगाम … more →