Blogs about: Apnauan Se

आलोचना किसी की, बिफरता कोई और है-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हिंदी ब्लाग जगत में नित नये अनुभव होते हैं। यह पता ही नहीं लगता कि कोई उसी बात पर नाराज हो रहा है जि … more →

Tags: alekh, arebic, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय, समाज

इस ब्लोग की पाठक संख्या दस हजार के पार

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज दीपकबापू कहिन ने १० हजार पाठकों का आंकडा पार कर लिया है. मेरे द्वारा बनाया जब यह ब्लोग बनाया गया … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दृष्टिकोण, बिंब-प्रतिबिंब, व्यंग्य, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Blogging

खुले बाजार का खेल

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कभी ताज के लिये संदेश  हवा में उड़ाकर   सारी दुनिया में दिलाते सम्मान   लोगों की बुद्धि  को घुमाने क … more →

Tags: inglish, हिन्दी, कविता, ताजमहल, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Life, media

दूसरे आंदोलन के लिये नये अगुवा की तलाश

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:   स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएँ  ————————- — … more →

Tags: arebic, Art, क्षणिका, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Education, Life

अगर रपट होती तो हम भी नक़ल कर कुछ लिख पाते

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यह कविता काल्पनिक है तथा किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है। कल सांय प्रकाशित रचना कुछ न … more →

Tags: Blogroll, vews, देश-दुनिया, inglish, feature blog, हिन्दी, Dashboard, Global Dashboard, sher-o-shayree

जहाँ बैठेंगे चार सच्चे साधू

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है तथा किसी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है-          गलत टाईम सेट … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, देश-दुनिया, देश-विदेश, Public Blog, inglish, feature blog, हिन्दी

कहें दीपक बापू मत पडो हिट- फ्लॉप के चक्कर में

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:  (यह रचना कल नारद पर प्रकाशित नहीं थी इसलिये यहाँ पुन: प्रकाशित की गयी है) वह प्रतिदिन हिट होने के न … more →

Tags: आचरण, कविता, क्षणिका, चरित्र, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, शायरी

धनी मदांध से विनम्र निर्धन की दोस्ती भली

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाता है पर रात को जो भटका वह सुबह तक वापस नहीं आये तो घर में तूफ़ान म … more →

Tags: Blogroll, vews, hindi, Public Blog, inglish, feature blog, हिन्दी, Dashboard, Global Dashboard

हमारी रचना से तो उनकी कमेन्ट अच्छी

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: लोग रचनाओं की चर्चा तो बहुत करते हैं पर उन पर आयी कमेंट भी कम महत्व की नहीं होती है-और कभी – क … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिंदी, हिन्दी, Dashboard, Global Dashboard, दृष्टिकोण, अभिव्यक्ति, नज़रिया

दिखावे के सिरमौर

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने मुहँ से बढ़ाएं, अपनी बात का भाव दुसरे को दें नसीहत, अपने मन में दुर्भाव न वाणी में मिठास, न वि … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आचरण, कविता, चरित्र, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, देश-दुनिया, नज़रिया, पर्यावरण

नए और फ्लॉप लेखक हिट्स से विचलित न हौं

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और मे … more →

Tags: Blogroll, hindi, हिंदी, Dashboard, दृष्टिकोण, संपादकीय, अभिव्यक्ति, नज़रिया, बिंब-प्रतिबिंब

निष्काम और सहज भाव से लिखो, बदलाव आते रहेंगे

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                      लिखने से इन्कलाब या बदलाव नहीं आता पर बिना लिखे भी कौनसा आ जाता है। इन्कलाब ला … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आचरण, गौरव, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, नज़रिया, बिंब-प्रतिबिंब, संपादकीय, सूचना

लोगों का पथ और यात्रा अवरुध्द करना क्या उचित है?

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                  इस देश में लोकतंत्र है और अपनी मांगों के समर्थन में आन्दोलन करने का सभी लोगों को ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आचरण, चरित्र, दृष्टिकोण, नज़रिया, बिंब-प्रतिबिंब, संपादकीय, सूचना, हिंदी

लोकतंत्र के चारों और झुंडों का घेरा

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: लोगों के झुंड लेकर निकलते है वह रोज नारे बदल-बदलकर अपना नाम अखबार में छपवाते हैं शीर्षक बदलकर झुंड म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आचरण, कविता, चरित्र, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, नज़रिया, शायरी, हिन्दी

सर्वांगीण विकास की बात क्यों नही करते

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                 यह प्रश्न नहीं है कि किसी जात के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की माँग जायज है कि … more →

Tags: आचरण, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, देश-दुनिया, नज़रिया, संपादकीय, सूचना, हिन्दी, Blogroll

अमन के लिए शोर मचाते हैं

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दिन में झंडे और डंडे देकर लोगों को हाथ में देकर सड़कों पर जुलूस निकल्वाएंगे शाम को शांति की बात करन … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आचरण, कविता, नज़रिया, शायरी, हिंदी, हिन्दी, Blogroll, Dashboard

अनजानी राहों पर चलने का मज़ा 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपनों से बढती दूरी का दर्द अब बहुत हो गया है इसीलिये गैरों में अपनेंपन की तलाश का प्रचलन हो गया है फ … more →

Tags: हिन्दी, Blogroll, Global Dashboard, hindi, shayree, sher-o-shayree

पहले अपने को ही पहचान ले मेरे मन!1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: किसके मन में क्या है कौन जानेगा अपने मन को ही भला कौन जानता है पल-पल हालात के साथ बदलता मन कौन लगाम … more →

Tags: हिन्दी, Blogroll, Global Dashboard, inglish


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