Blogs about: Apnauan Se
खुले बाजार का खेल
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: कभी ताज के लिये संदेश हवा में उड़ाकर … more »
दूसरे आंदोलन के लिये नये अगुवा की तलाश
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: स्वाधीनता दिवस की शुभकामनाएँ —— … more »
हमारी रचना से तो उनकी कमेन्ट अच्छी
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लोग रचनाओं की चर्चा तो बहुत करते हैं प … more »
नए और फ्लॉप लेखक हिट्स से विचलित न हौं
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंट … more »
निष्काम और सहज भाव से लिखो, बदलाव आते रहेंगे
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लिखने से इन्कलाब या बद … more »
लोगों का पथ और यात्रा अवरुध्द करना क्या उचित है?
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इस देश में लोकतंत्र है और … more »
लोकतंत्र के चारों और झुंडों का घेरा
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लोगों के झुंड लेकर निकलते है वह रोज ना … more »
सर्वांगीण विकास की बात क्यों नही करते
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यह प्रश्न नहीं है कि किसी … more »
अमन के लिए शोर मचाते हैं
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दिन में झंडे और डंडे देकर लोगों को हाथ … more »
अनजानी राहों पर चलने का मज़ा
— 3 comments
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनों से बढती दूरी का दर्द अब बहुत हो ग … more »
पहले अपने को ही पहचान ले मेरे मन!
— 1 comment
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: किसके मन में क्या है कौन जानेगा अपने म … more »
