अपने चेहरे से जो जाहिर है, छुपाये कैसे, तेरी मरजी के मुताबिक नज़र आए कैसे, घर सजाने का तसबुर तो बहुत बाद का है, पहले यह तय हो के इस घर को बचाए कैसे, कहकहा आंख का बर्ताव बदल देता है, हँसने वाले तुझे आंस… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: अपने चेहरे से जो जाहिर है, छुपाये कैसे, तेरी मरजी के मुताबिक नज़र आए कैसे, घर सजाने का तसबुर तो बहुत … more →